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Centre: केंद्र ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लिखा पत्र, विकास गतिविधियों के बाधित होने का मामला उठाया

Fri, 15 Mar 2024 07:48 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Centre: पर्यावरण और जनजातीय मामलों के मंत्रालय ने गुरुवार को साझा रूप से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखा। पत्र में वन अधिकार अधिनियम (एफआरए), 2006 के उचित क्रियान्वयन के लिए दिशानिर्देश और स्पष्टीकरण जारी किए गए। 
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वनवासी (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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केंद्र ने राज्य सरकारों को पत्र लिखा है। इसमें उसने कहा है कि जहां वन अधिकार धारकों के लिए स्कूल, अस्पताल और जल आपूर्ति जैसे बुनियादी ढांचे के निर्माण की अनुमति नहीं दी जा रही है, वहां उनका समग्र सामाजिक और आर्थिक विकास बाधित हो रहा है। 

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पर्यावरण और जनजातीय मामलों के मंत्रालय ने गुरुवार को साझा रूप से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखा। पत्र में वन अधिकार अधिनियम (एफआरए), 2006 के उचित क्रियान्वयन के लिए दिशानिर्देश और स्पष्टीकरण जारी किए गए। 

एफआरए उन अनुसूचित जनजातियों और अन्य वनवासियों को वनों पर अधिकार प्रदान करता है, पीढ़ियों से जंगलों में रहते हैं, लेकिन उनके अधिकारों का दस्तावेजीकरण नहीं किया गया है।  

केंद्रीय मंत्रालयों ने कहा कि केंद्र ने लगातार राज्य के विभागों से वन अधिकार धारों को सभी जरूरी मदद और मार्गदर्शन प्रदान करने और उनकी आजीविका को बढ़ाने के लिए परियोजनाओं और कार्यक्रमों को शुरू करने का आग्रह किया है। पत्र में आगे कहा गया, राज्यों से वन अधिकार धारकों के समग्र सामाजिक और आर्थिक विकास को सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित विभागों को समन्वय करने का भी अनुरोध किया गया है। 

हालांकि, केंद्र सरकार के संज्ञान में आया है कि अभी भी राज्यों में आवास, कृषि और आजीविका योजनाओं के तहत लाभ सहित वन अधिकारों के धारकों को दावे करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।   
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पत्र में मंत्रालयों ने इसके लिए उदाहरण देते हुए समझाया कि एफआरए, 2006 की धारा 3 (2) स्कूलों, अस्पतालों, आंगनवाड़ी, उचित मूल्य की दुकानों, बिजली और दूरसंचार लाइनों, पेयजल आपूर्ति, सिंचाई नहरों, गैर-पारंपरिक उर्जा स्त्रोतों, कौशल विकास या व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्रों, सड़कों और सामुदायिक केंद्रों सहित 13 विकास गतिविधियों के लिए भूमि के डायवर्जन की अनुमति देती है। इसमें आगे कहा गया है कि पीएम-जनमन योजना इन सुविधायों की कमी वाली बस्तियों के लिए सड़कों, छात्रावासों, बहुद्देशीय केंद्रों, आंगनवाड़ी केंद्रों और दूरसंचार कनेक्टिविटी के निर्माण का प्रावधान करती है। लेकिन केंद्र के ध्यान में यह बात लाई गई है कि राज्यों में इन सुविधाओं के निर्माण की अनुमति नहीं दी जा रही है। 
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