ऐसा पहली बार होगा जब भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) भारत के स्वतंत्रता दिवस को भव्य तरीके से मनाएगी। सीपीआई के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पार्टी के हर एक कार्यालय पर राष्ट्रीय तिरंगा फहराया जाएगा।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) द्वारा यह स्वतंत्रता झूठी है का नारा लगाने के सात दशक से भी अधिक समय के बाद ऐसा हुआ है कि कम्युनिस्ट पार्टी बड़े पैमाने पर स्वतंत्रता दिवस मनाएगी। 1964 में सीपीआई में विभाजन के बाद सीपीआई (एम) अस्तित्व में आई।
माकपा केंद्रीय समिति के सदस्य सुजान चक्रवर्ती ने कहा कि पार्टी द्वारा यह तय किया गया है कि 75वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पार्टी के हर कार्यालय में तिरंगा फहराया जाएगा। चक्रवर्ती सीपीआई के पश्चिम बंगाल राज्य समिति के एक वरिष्ठ पदाधिकारी हैं। उन्होंने इस तर्क को खारिज कर दिया कि पार्टी पहली बार यह दिवस मना रही है और कहा कि यह पहले भी अलग तरीके से मनाया जाता था।
जान चक्रवर्ती ने कहा हम आमतौर पर फासीवादी ताकतों, सांप्रदायिक ताकतों द्वारा देश के सामने आने वाले मुद्दों और खतरों पर चर्चा करके स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं। इस बार यह दिन बड़े तरीके से आयोजित किया जाएगा। आगे कहा कि 75 या 100वां वर्ष हर बार नहीं आता है।
माकपा के एक अन्य नेता ने कहा कि पार्टी के लाल झंडे के साथ तिरंगा फहराया जाएगा जो पहली बार 15 अगस्त को माकपा कार्यालयों के ऊपर देखा जाएगा। साथ ही आगे के कार्यक्रमों पर भी विचार-विमर्श चल रहा है।
हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल के चुनाव में माकपा को करारी हार मिली। शायद इसलिए ये भी देशभक्ति के मार्ग पर चल पड़ी है। 2019 के लोकसभा और 2021 के विधानसभा चुनावों में माकपा के खराब प्रदर्शन रहा है।
भाजपा, कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस कम्युनिस्ट पार्टी पर आरोप लगाती रही है कि यह कम राष्ट्रीय और अधिक अंतरराष्ट्रीय है और स्वतंत्रता आंदोलन में उसका कोई योगदान नहीं था। हालाँकि, इस आरोप को कम्युनिस्टों द्वारा हमेशा नकारा गया है।