राजस्थान भाजपा के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया।
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चुनाव जीतने के लिए नेता अजब-गजब नुस्खे अपनाते हैं। भाजपा नेता डॉ. सतीश पूनिया भी चुनाव जीतने के लिए एक ऐसे अजूबे नुस्खे को आजमा रहे हैं जो इस समय चर्चा का केंद्र बन गई है। पूनिया ने शाम का भोजन करना ही छोड़ दिया है। उन्होंने कहा है कि अब वे तभी शाम का भोजन करेंगे जब राजस्थान में भाजपा की सरकार बन जायेगी। भाजपा नेता का प्रण केवल यही तक नहीं रुका है। उन्होंने यह भी तय किया है कि जब तक राजस्थान में भाजपा की सरकार नहीं बनती, वे किसी भी कार्यक्रम में फूल की माला नहीं पहनेंगे।
दरअसल, डॉ. सतीश पूनिया राजस्थान भाजपा के पूर्व अध्यक्ष रहे हैं। वे भाजपा के उन चंद नेताओं में शामिल हैं जिनकी प्रशंसा स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। पीएम मोदी ने दिल्ली में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में कहा था कि सतीश पूनिया से यह सीखा जाना चाहिए कि संगठन में सबको साथ लेकर कैसे चला जाता है। उन्होंने उनके दलित-वंचित तबकों से संपर्क साधने और महिलाओं-युवाओं को आगे बढ़ाने के उनके कार्यों की भी प्रशंसा की थी। इसके बाद से ही यह चर्चा चलने लगी थी कि राजस्थान में चुनाव जीतने के बाद सतीश पुनिया भाजपा की तरफ से मुख्यमंत्री के सबसे बड़े दावेदार बन सकते हैं। वे इस समय जयपुर की आमेर विधानसभा से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
उन्होंने अपने कार्यकाल में पूरे राजस्थान का दौरा किया। हर विधानसभा क्षेत्र के हर बूथ पर पन्ना प्रमुख, शक्ति केंद्र प्रमुख और बूथ प्रमुख स्थापित करने का सबसे पहला काम राजस्थान में ही पूरा किया गया था। मोदी सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों, कोरोना काल में भाजपा द्वारा किए गए सेवा कार्यों, आमेर विकास मॉडल और भाजपा संगठन की मजबूती एवं सामाजिक सरोकारों के नाम पर भाजपा को वोट देने की सतीश पूनियां अपील कर रहे हैं।
गुजरात चुनाव में ही दिखी थी प्रतिभा
भाजपा के मात्रि संगठन आरएसएस से जुड़े रहे डॉ. पुनिया को संगठन का व्यक्ति माना जाता है। वे राष्ट्रीय नेतृत्व की निगाह में तभी आये थे जब गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान मिली सीटों पर भाजपा को शानदार जीत सफलता दिलाने का काम किया था। उनके इसी काम को देखते हुए बाद में पार्टी ने उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी थी।