बिहार की विधानसभा सीटों से जुड़ी खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज बात गोविंदपुर सीट की करेंगे। गोविंदपुर सीट से 15 चुनाव में से 10 चुनाव में एक ही परिवार को जीत मिली। हालांकि 2020 के चुनाव में इस परिवार के उम्मीदावार को हार का सामना करना पड़ा।
बिहार में साल के अंत में चुनाव होने हैं। चुनाव के पहले ही बिहार में सियासी हलचल देखने को मिल रही है। पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। इस चुनावी हलचल के बीच अमर उजाला का खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज गोविंदपुर सीट की बात करेंगे। इस सीट पर अब तक हुए 15 चुनाव में 10 चुनाव में गायत्री देवी और उनके परिवार को जीत मिली। इस सीट की खास बात यह भी है कि करीब 22 साल तक विधायक रही गायत्री देवी को 2005 में अपने ही बेटे से चुनाव हारना पड़ा।
बिहार के 38 जिलों में से एक जिला नवादा भी है। नवादा जिला दो अनुमंडल और 14 ब्लॉक में बंटा है। जिले में पांच विधानसभा सीटें हैं। इनमें रजौली, हिसुआ, नवादा,गोविंदपुर, वारिसलीगंज शामिल हैं। आज सीट का समीकरण में गोविंदपुर सीट की बात करेंगे। यह सीट 1967 में अस्तित्व में आई।
1967: कांग्रेस को मिली जीत
1967 के चुनाव में गोविंदपुर सीट से कांग्रेस को जीत मिली। इस चुनाव में कांग्रेस के अमृत प्रसाद ने निर्दलीय टीएनपी यादव को 3,909 वोट से हराया।अमृत प्रसाद को कुल 15,196 वोट मिले। वहीं, टीएनपी को कुल 11,287 वोट मिले।
1969: लोकतंत्रिक कांग्रेस को मिली जीत
1969 के चुनाव में लोकतंत्रिक कांग्रेस के युगल किशोर सिंह यादव को 644 वोट से जीत मिली। कांग्रेस के अमृत प्रसाद दूसरे नंबर पर रहे। युगल किशोर को कुल 15,239 और अमृत प्रसाद को 14,595 वोट मिले।
1970: युगल किशोर की पत्नी को मिली जीत
1970 तत्कालीन विधायक युगल किशोर सिंह यादव के निधन के कारण गोविंदपुर सीट से उपचुनाव हुए। इस चुनाव में निर्दलीय मैदान में उतरीं युगल किशोर सिंह की पत्नी गायत्री देवी यादव को जीत मिली। उन्होंने कुल 46,279 वोट मिले।
1972: कांग्रेस की वापसी
1972 में अमृत प्रसाद ने फिर से जीत दर्ज की। इस चुनाव में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार लक्ष्मी नारायण सिंंह को 6,375 वोट से मात दी। अमृत प्रसाद को कुल 25,303 वोट मिले। वहीं, लक्ष्मी नारायण को 18,928 वोट मिले।
1977: जनता पार्टी को मिली जीत
1977 के विधानसभा चुनाव में जनता पार्टी के भात्तू महतो को 10,236 वोट से जीत मिली। इस चुनाव में कांग्रेस की गायत्री देवी दूसरे नंबर पर रहीं। भूत्तो महतो को कुल 41,952 वोट मिले। वहीं, गायत्री देवी को 31,716 वोट मिले।
1980: गायत्री देवी की वापसी
1995: केबी प्रसाद को मिली जीत
जनता दल के केबी प्रसाद ने पिछले चुनाव का बदला लेते हुए 1995 में जीत हासिल की। इस चुनाव में उन्होंंने चार बार की विधायक गायत्री देवी को 24,244 वोट से हराया। केबी प्रसाद को 39,098 वोट मिले। वहीं, गायत्री देवी को मात्र 14,854 वोट मिले।
2000: गायत्री देवी को मिली जीत
2000 के चुनाव में गायत्री देवी ने राजद के टिकट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इस चुनाव में उन्होंने समता पार्टी के मोहन सिंह को 8,919 वोट से हराया। गायत्री देवी को कुल 45,930 वोट मिले। वहीं, मोहन सिंह को 37,011 वोट मिले।
फरवरी 2005: अपने बेटे से हारी गायत्री देवी
2015: बीस साल बाद कांग्रेस की वापसी
2015 के चुनाव में गोविंदपुर सीट से तत्कालीन विधायक कौशल यादव की पत्नी पूर्णिमा यादव चुनावी मैदान में उतरीं। उन्होंने यह चुनाव कांग्रेस के टिकट पर लड़ा और जीता। उन्होंने भाजपा की फुला देवी को 4,399 वोट से हराया। पूर्णिमा यादव को कुल 43,016 वोट मिले। वहीं, फुला देवी को 38,617 वोट मिले।
2020: पूर्णिमा यादव को मिली हार
2020 के चुनाव में पूर्णिमा यादव ने जदयू के टिकट पर चुनाव लड़ा। हालांकि उन्हें इस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में राजद के एमडी कामरान ने 33,074 वोट से मात दी। कामरान को कुल 79,557 वोट मिले। वहीं पूर्णिमा यादव को 46,483 वोट से संतोष करना पड़ा।
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