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ससुर के बाद देवर से हलाला की शर्त, पीड़िता बोली- अब और तमाशा नहीं बनना

Mon, 09 Jul 2018 03:38 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली
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निकाह के दो साल बाद ही पहली बार तलाक, रहम की भीख मांगी तो शौहर दोबारा निकाह के लिए तैयार हुआ लेकिन शर्त रखी कि उसके पिता से हलाला करना होगा। मजबूरी में ससुर के साथ हलाला करना पड़ा। कुछ साल जैसे-तैसे फिर गुजरे मगर पिछले साल शौहर ने फिर तलाक देकर घर से निकाल दिया। फरियादों और गुहार के एक लंबे दौर के बाद शौहर फिर दोबारा निकाह के लिए तैयार हुआ लेकिन इस बार उसने अपने छोटे भाई के साथ हलाला करने की शर्त रखी। बगैर मां-बाप की यह युवती अपने भाइयों के किसी भी तरह की मदद से इंकार कर दिए जाने के बावजूद यह शर्त मंजूर नहीं कर पाई। उसने देवर के साथ हलाला करने से इंकार कर दिया और यह कहकर अपनी बहन के घर रहने चली गई कि वह अब और अपना तमाशा नहीं बनवा सकती।

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मुरावपुरा में रहने वाली इस युवती ने रविवार को आला हजरत खानदान की बहू निदा खान की प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया के सामने आपबीती बयान की। उसने बताया कि नौ साल पहले 2009 में उसका सुर्खा रजा चौक में रहने वाले वसीम हुसैन से निकाह हुआ था। कुछ समय बाद ही शौहर उसके साथ बेवजह मारपीट करने लगा। 2011 में अचानक एक दिन उसे तीन तलाक देकर घर से निकाल दिया। काफी फरियादों और बातचीत के बाद वसीम उससे दुबारा निकाह के लिए तैयार हुआ, लेकिन उसने जब अपने पिता के साथ हलाला करने की शर्त रखी तो वह सन्न रह गई। गुजर-बसर का कोई और रास्ता नहीं था इसलिए उसे अपने ससुर के साथ हलाला करने को मजबूर होना पड़ा।

हलाला के बाद वसीम ने उससे निकाह तो कर लिया, लेकिन उसे प्रताड़ित करना नहीं बंद किया। युवती ने बताया कि वह वसीम की ज्यादतियां अपना नसीब समझकर बर्दाश्त करती रही, लेकिन फिर भी पिछले साल वसीम ने उसे दुबारा तलाक देकर घर से निकाल दिया। युवती ने बताया कि उसने वसीम के आगे दोबारा रहम की भीख मांगी तो वसीम ने इस बार अपने भाई के साथ हलाला करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया।
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मगर उसने यह कहकर इंकार कर दिया कि न वह और जलालत झेलेगी न तमाशा बनेगी। इसके बाद वह अपनी बहन के घर रह रही है। शौहर के खिलाफ मारपीट कर घर से निकालने की एफआईआर भी करा दी है। 

जुल्मी शौहर को मिले सजा, अब बस यही इच्छा
पीड़ित युवती ने कहा कि उसने अपने ससुर के साथ मजबूरी में हलाला कर लिया था। वजह यह थी कि कहीं और आसरा मिलने का ठिकाना ही नहीं था। समस्या यह थी कि उसके मां-बाप नहीं है। भाइयों से भी कोई खास मदद नहीं मिली। मगर अब देवर के साथ हलाला करने की शर्त से वह बहुत ज्यादा शर्मिंदा महसूस कर रही है। उसने कहा कि वह देवर से हलाला नहीं करेगी। अब उसकी एक ही इच्छा है कि उसके शौहर को उसके किए की सजा मिले।

दीन में जबरदस्ती नहीं, जुल्म किया है तो शौहर को मिले सजा
ला इकराफिद्दीन यानी दीन में जबरदस्ती नहीं है। हलाला की रस्म पर शरई एतबार से तो कोई सवाल नहीं है, लेकिन दोबारा निकाह के बाद फिर तलाक देकर देवर के साथ हलाला की शर्त रखना या दबाव बनाना गलत है। यह औरत की मर्जी पर है कि वह किसके साथ निकाह करके हलाला पूरा करेगी। निजी तौर पर यह कहूंगा कि अगर हलाला के लिए दबाव बनाया गया तो यह औरत पर जुल्म है और इसके लिए मुफ्तियाने इकराम को शौहर पर हुक्म तय करना चाहिए।  - मौलाना सैय्यद असलम मियां वामिकी, नायब सज्जादा खानकाह वामिकिया

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