सीएससी-एसपीवी के सीईओ दिनेश त्यागी ने कहा कि यह पहली बार है जब पूरी तरह पेपरलेस आर्थिक आंकड़े जुटाए जाएंगे। इससे सर्वे का काम महज छह माह में पूरा किया जा सकेगा जिसमें अभी तक दो वर्ष का समय लगता है। डाटा जुटाना आसान होने से भविष्य में यह सर्वे हर दो वर्षों पर किया जा सकेगा जो अभी 10 साल में किया जाता है।
प्रति परिवार मिलेंगे 20 रुपये
सर्वे में शामिल गणनाकारों को मेहनताने के रूप में प्रति परिवार 15-20 रुपये दिए जाएंगे। अनुमान है कि सर्वे में देशभर के करीब 20 करोड़ परिवार गणना में शामिल होंगे। इस पर करीब 300 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। हाल में ही सीएससी ने कुछ माह के भीतर ही आयुष्मान भारत के तहत 14 राज्यों में एक करोड़ पंजीकरण किए थे।
सांख्यिकी मंत्रालय के उप महानिदेशक पंकज श्रीवास्तव ने इस बारे में कहा कि आर्थिक जनगणना सही आंकड़े जुटाकर बदलाव लाने की दिशा में अहम उपलब्धि होगी। सूचना प्रौद्योगिकी की मदद से हम सभी हिस्सेदारों के साथ समन्वय कर इस काम को अंजाम देंगे।