नाहन बस स्टैंड पर मास्क पहने बगैर खड़े यात्री व स्कूली बच्चे।
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नाहन (सिरमौर)। एक समय था जब लोग बगैर मास्क घर से बाहर नहीं निकलते थे। किसी आदमी से मिलने का खौफ भी हर समय रहता था। कहीं भीड़ दिखना तो दूर। अपनों से भी लोग मिलते तो कोविड प्रोटोकाल का ध्यान रखा जाता था लेकिन अब लोग महामारी के प्रकोप को भूल चुके हैं।
लोगों में कोरोना का खौफ पहले जैसा नजर नहीं आ रहा, जहां देखो भीड़। मास्क गिने-चुने लोग ही इस्तेमाल में ला रहे हैं। एक-दूसरे से मिलना-मिलाना अब सामान्य दिख रहा है। जिला सिरमौर में भले ही कोरोना के बेहद कम मामले सामने आ रहे हैं लेकिन अभी कोरोना गया नहीं।
शुक्रवार को जिला मुख्यालय नाहन में कुछ ऐसा ही हाल नजर आया। जहां नजर गई लोग बेखौफ दिखे। कहीं भीड़ का आलम रहा तो कहीं लोग बिना मास्क लगाए नजर आए। यूं कहें कि नाहन शहर में पांच से दस फीसदी लोग ही मास्क पहनते दिख रहे हैं। बस स्टैंड पर लोगों की काफी आवाजाही रहती है। इसको लेकर दोपहर 12 बजे से 12:20 तक आने जाने वालों पर नजर रखी गई। इस स्थान पर इक्का-दुक्का लोग ही मास्क पहने दिखे। कई लोगों ने मास्क गले में लटकाए थे। सामाजिक दूरी यहां नजर नहीं आई। कई बसें भी सवारियों से खचाखच भरी दिखीं।
दोपहर करीब एक बजे से डेढ़ बजे तक शहर के विभिन्न स्थलों का भी मुआयना किया गया तो कोविड नियमों की धज्जियां उड़ते दिखीं। एक बजे शहर के बड़ा चौक में सब्जी खरीदने आए लोग भी बिना मास्क नजर आए। स्थानीय बाजार में किसी भी दुकानदार एवं सब्जी विक्रेता ने मास्क नहीं पहना हुआ था। यहां जब मास्क न पहनने वाले लोगों से पूछा गया तो जवाब मिला कि अब महामारी खत्म हो चुकी है। वैक्सीन आ गई है। फिर खतरा किस बात का।
उधर, मास्क पहनते दिखे बुजुर्ग प्रदीप शर्मा एवं शमशेर सिंह ठाकुर ने कहा कि मास्क पहनना जरूरी है। कोरोना से तभी हम बच पाएंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे भी मास्क पहनने में कोई बुराई नहीं है। मास्क से हम धूल एवं कीटाणुओं से भी बचेंगे।
पुलिस अधीक्षक ओमापति जम्वाल ने कहा कि पुलिस मास्क न पहनने वालों का चालान कर रही है। उन्होंने कहा कि आम आदमी की स्वयं की जिम्मेदारी है कि कोरोना महामारी की जंग में वह मास्क पहनें। पुलिस के डर से ही मास्क न पहनें।