फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कीवी, अखरोट के पौधे के नाम पर लूट-खसोट

विज्ञापन
विज्ञापन
फरेंद्र ठाकुर
विज्ञापन

कुल्लू। प्रदेश में सेब के बाद अब फलदार पौधों के व्यापारी बागवानों को कीवी व अखरोट के पौधे महंगे दाम पर बेचकर लूट-खसोट कर रहे हैं। निजी नर्सियों की ओर से बागवानों से पौधे की दोगुनी कीमत वसूली जा रही है। इससे बागवान परेशान हो गए हैं।
सरकारी नर्सरी में 150 रुपये में बिकने वाले कीवी पौधे को व्यापारी बाजार में 350 रुपये तक बेच रहे हैं, जो बागवानों की खरीद से बाहर हो गया है। अखरोट के पौधे को भी 120 रुपये की बजाय 300 से 350 रुपये में बेचा जा रहा है। इससे कुछ सप्ताह पहले सेब, प्लम, नाशपाती व अनार के पौधों की व्यापारी वर्ग ने बागवानों से दोगुनी कीमत वसूल की थी। सेब के पौधे का सरकारी दाम 125 रुपये था, जिसे बाजारों में 200 से 250 में बेचा जा रहा था। प्लम का पौधा 100 की बजाय 200 से 230 रुपये, नाशपाती पौधा 100 की जगह 200 से 250 में बिक रहा था। हालांकि पिछले वर्ष व्यापारी व नर्सरी संचालक पौधों को सस्ते दाम में बेच रहे थे। लेकिन इस वर्ष ऐसा नहीं है। पौधों के दाम ज्यादा होने से बागवान खरीद नहीं पा रहे हैं। बगीचों में नए पौधो को लगाने का काम आगामी मार्च तक चलेगा। इसके लिए पौधों की खरीद कर रहे हैं। यही कारण है कि बाजारों में बागवानों की भीड़ जुटना शुरू हो गई है। हालांकि कई बागवान सरकारी व पंजीकृत नर्ससियों से पौधों की खरीद कर रहे हैं। बागवान सुरेश कुमार, सोहन लाल, सोनम व योग राज ने बताया कि बाजारों में कीवी व अखरोट के पौधे की दोगुनी कीमत वसूली जा रही है। इस पर सरकार और विभाग दोनों ध्यान नहीं दे रहा है। संवाद
विज्ञापन

हृदय, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में फायदेमंद कीवी
कीवी पौधे में मौजूद विटामिन, खनिज, एंटीऑक्सीडेंट और पॉलीफेनॉल हृदय संबंधी बीमारियों के खतरे को कम करते हैं। यह हृदय रोग के खतरे से बचा सकता है। कीवी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी मददगार है। यह विटामिन-सी और विभिन्न पॉलीफेनॉल की मौजूदगी के कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। इससे इसकी मांग ज्यादा रहती है। हालांकि कुल्लू जिले में कुछ क्षेत्रों में बागवान इस पौधे को लगाते हैं।
विज्ञापन

सरकारी व पंजीकृत नर्सरी से खरीदें पौधे : उपनिदेशक
बागवानी विभाग कुल्लू के उपनिदेेशक डॉ. बीएम चौहान ने बताया कि निजी नर्सरी संचालकों पर कार्रवाई का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में उत्पादक बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र और पंजीकृत नर्सरी से नए पौधों की खरीद करें। यहां पर उत्पादकों को कम दाम पर पौधे उपलब्ध होंगे। पौधों को लगाने का काम मार्च तक चलेगा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें