शुक्रवार शाम को साढ़े पांच बजे मैक्लोडगंज के मालरोड का नजारा।
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धर्मशाला। पिछले साल कोरोना काल में होटल कारोबारियों के लिए शुरू हुआ मुसीबतों का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। 12 जुलाई को भारी बारिश के बाद इक्का-दुक्का सैलानी ही मैक्लोडगंज और भागसूनाग आ रहे हैं। पर्यटकों के न आने से यहां के कई होटल एक बार फिर से बंद होने की कगार पर पहुंच चुके हैं। मैक्लोडगंज-भागसूनाग में वीकेंड पर भी ऑक्यूपेंसी पांच फीसदी तक सिमट गई है।
होटल कारोबारियों की कमाई बंद होने से बैंक की किस्तें तक चुकाना मुश्किल हो गया है। ऊपर से स्टाफ की तनख्वाह और बिजली-पानी के बिल का भी लगातार भुगतान करना पड़ रहा है। लगातार मंदी की मार झेल रहे होटल कारोबारियों का कहना है कि वे हफ्ता भर और इंतजार करेंगे। अगर अब भी पर्यटक नहीं आए, तो उन्हें मजबूरन अपने-अपने होटलों पर ताले लगाने लगाने पड़ेंगे। वहीं, पर्यटन नगरी मैक्लोडगंज-भागसूनाग में इन दिनों मौसम बेहद खुशनुमा बना हुआ है। इसके बावजूद मैदानी राज्यों से यहां घूमने के लिए पर्यटक कतरा रहे हैं। होटल कारोबारी डॉ. विशाल नैहरिया ने बताया कि इस हफ्ते पर्यटकों के न आने से मैकलोडगंज-भागसूनाग में पर्यटन क्षेत्र में रोजगार हासिल कर रहे लोगों को पांच से छह करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है।
खुशनुमा है मौसम, बिना डर के आएं सैलानी
होटल एवं रेस्तरां एसोसिएशन मैक्लोडगंज के अध्यक्ष अश्विनी बांबा ने बताया कि एक महीने से लगातार होटल कारोबारी मंदी की मार झेल रहे हैं। अब तो होटल मालिकों की उम्मीदों ने भी दम तोड़ना शुरू कर दिया है। अगर इस सप्ताह भी पर्यटक मैकलोडगंज नहीं पहुंचे, तो धीरे-धीरे यहां कई होटल बंद होने शुरू हो जाएंगे। उन्होंने सैलानियों से अपील की है कि आजकल यहां का मौसम खुशनुमा है। सैलानी बिना डर के यहां आएं और खूबसूरत नजारों का लुत्फ उठाएं। वह यहां सुरक्षित हैं।
मंदी से उबर नहीं पाया होटल कारोबार
होटल एवं रेस्तरां एसोसिएशन स्मार्ट सिटी के जनरल सेक्रेटरी संजीव गांधी ने बताया कि पीक सीजन में धर्मशाला क्षेत्र में आठ-दस करोड़ रुपये का कारोबार हो जाता है। पिछले एक महीने से यहां मंदी को दौर लगातार जारी है। इससे होटल कारोबारियों, ढाबा-रेस्तरां मालिकों, टैक्सी चालकों और स्थानीय दुकानदारों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।