फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तकनीक: सुरक्षा का नया साथी, गलत कदम रखा तो अलर्ट करेगा सारथी; विशेषज्ञों ने विकसित किया स्मार्ट शू इंसोल

Sun, 22 Feb 2026 10:02 AM IST
अंकेश डोगरा कमलेश रतन भारद्वाज, हमीरपुर।

सार

स्मार्ट शू इंसोल 'सारथी' गलत कदम उठाते ही आपका मोबाइल आपको सचेत कर देगा। गलत कदम मतलब चाल वाला। जी हां, ये शू इंसोल विकसित किया है एनआईटी हमीरपुर और पीजीआई चंडीगढ़ के विशेषज्ञों ने। विस्तार से जानें...
विज्ञापन
स्मार्ट शू इंसोल ‘सारथी’ - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पैरों के दर्द, गलत चाल और असंतुलन से जूझ रहे लोगों को बड़ी राहत मिलने वाली है। अब गलत कदम उठाते ही आपका मोबाइल आपको सचेत कर देगा। नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ टेक्नोलाॅजी (एनआईटी) हमीरपुर और पीजीआई चंडीगढ़ के विशेषज्ञों ने मिलकर सेंसर आधारित स्मार्ट शू इंसोल ‘सारथी’ विकसित किया है, जो चलने के हर कदम पर नजर रखता है। गड़बड़ी होते ही मोबाइल एप के जरिये रेड अलर्ट देता है।

विज्ञापन

इस तकनीक को इसी साल जनवरी में भारतीय पेटेंट कार्यालय से मंजूरी मिल चुकी है। ‘सारथी’ को किसी भी जूते में आसानी से फिट किया जा सकता है। इसमें लगे प्रेशर सेंसर और इनर्शियल मोशन सेंसर पैर के अलग-अलग हिस्सों पर पड़ने वाले दबाव, एंगल और मूवमेंट को रियल टाइम में रिकॉर्ड करते हैं। ब्लूटूथ के जरिये यह इंसोल मोबाइल पर इंस्टॉल ‘स्पंधिका’ एप से जुड़ता है। यदि उपयोगकर्ता गलत एंगल या दिशा में कदम रखता है, तो एप तुरंत रेड अलर्ट देता है।

डाटा को ग्राफ और कलर-कोडेड मैप के रूप में दिखाया जाता है, जिससे डॉक्टर और मरीज दोनों चाल की गड़बड़ियों को आसानी से समझ सकें। वर्ष 2023-24 में पीएचडी स्कॉलर ने मुख्यमंत्री स्टार्टअप योजना के तहत ‘स्पंधिका आर्थोटिक्स’ नामक कंपनी  पंजीकृत कर इसका प्रोटोटाइप  तैयार किया। महज पांच हजार रुपये की लागत से बना यह स्मार्ट इंसोल ऑर्थोपेडिक आकलन, स्पोर्ट्स बायोमैकेनिक्स विश्लेषण और पैरों के स्वास्थ्य जांच में उपयोगी है। पोर्टेबल होने के कारण इसे क्लीनिकल और गैर-क्लीनिकल दोनों वातावरण में बार-बार इस्तेमाल किया जा सकता है। 
विज्ञापन

दवा नहीं, सही चाल से उपचार  
'सारथी' की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह दवाओं पर निर्भरता कम कर चाल में सुधार के जरिये उपचार की दिशा दिखाता है। असामान्य प्रेशर जोन, गलत वजन ट्रांसफर और मूवमेंट में बदलाव की सटीक जानकारी मिलने से डॉक्टर बेहतर उपचार योजना बना सकते हैं और रिकवरी की निगरानी कर सकते हैं। दिव्यांगों, बुजुर्गों और खिलाड़ियों के लिए यह तकनीक खास तौर पर लाभकारी साबित हो सकती है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें