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मरीजों की संख्या बढ़ने पर डेंगू टेस्ट का शुल्क बढ़ा

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संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। जिले में डेंगू का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। शहर सहित जिले के अन्य हिस्सों में डेंगू के केस बढ़ रहे हैं। वहीं सरकारी आंकड़ों के अनुसार जिले की स्थिति काबू में है। वहीं डेंगू की जांच का शुल्क बढ़ गया है। पहले पांच से छह सौ रुपये में होने वाली जांच अब आठ सौ रुपये में हो रही है।
डेंगू के मरीज बढ़ने के साथ ही जांच किट की कमी हो गई है। ऐसे में लैब संचालकों को महंगी किट मंगवानी पड़ रही है। लैब संचालकों का कहना है कि किट के दाम बढ़ने के कारण उन्हें जांच का शुल्क बढ़ाना पड़ा है। पहले जो किट 150 से 200 रुपये में मिलती थी, वह अब चार से पांच सौ रुपये में मिल रही है। इस पर पहले पांच से छह सौ रुपये में होने वाली जांच अब आठ सौ रुपये में की जा रही है।
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वहीं विभाग का दावा है कि स्थिति पर काबू पा लिया गया है। विभाग के आंकड़ों के मुताबिक तीन दिन से जिले में कोई नया केस नहीं आया है। वहीं निजी अस्पतालों में प्रतिदिन करीब डेढ़ सौ मरीज बुखार की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। वहीं निजी चिकित्सक भी इनका डेंगू का उपचार कर रहे हैं, जबकि स्वास्थ्य विभाग निजी अस्पतालों की जांच को नहीं मानता है।
जिले में अब तक बुखार से करीब 15 लोगों की जान चली गई है। परिजनों का कहना है कि मौत का कारण डेंगू है। निजी अस्पतालों में बड़ी संख्या में वायरल व डेंगू के मरीज भर्ती हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार कुल 192 मरीज हैं, जबकि 132 लोगों की रिपोर्ट अभी आनी बाकी है। ऐसे में निजी लैब में भी टेस्ट करवाने वालों की लाइन लगीं है।
एनएस वन किट से कर रहे जांच
स्वास्थ्य विभाग की ओर से एलाइजा टेस्ट को ही सटीक माना जाता है। वहीं जिले में निजी अस्पतालों व लैब में एनएस वन कार्ड से टेस्ट किया जाता है। एलाइजा टेस्ट की 95 प्रतिशत तक रिपोर्ट बिल्कुल सही होती है। एनएस वन कार्ड में 90 प्रतिशत तक परिणाम सही आता है। इसके बावजूद लोग निजी लैब पर ही जांच कराने के लिए अधिक जा रहे हैं। भीड़ के कारण टेस्टिंग कार्ड महंगा हो गया है। लैब संचालकों का कहना है कि एनएस वन कार्ड अंबाला, करनाल, कुरुक्षेत्र से मंगवा रहे हैं।
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जिले में डेंगू की स्थिति नियंत्रण में है। स्वास्थ्य विभाग एलाइजा टेस्ट को मानता है। निजी अस्पतालों में किए जा रहे रैपिड टेस्ट मान्य नहीं है। जांच के लिए विभाग की ओर से छह रुपये निर्धारित किए गए हैं। कोई लैब वाला इससे ज्यादा शुल्क नहीं ले सकता है। यदि ऐसा हो रहा है तो विभाग में शिकायत की जा सकती है। कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. वागिश गुटेन, जिला मलेरिया अधिकारी।
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