फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन से दो किलोमीटर दूर रैन बसेरा, रात में नहीं पहुंच पाते मुसाफिर

विज्ञापन
शहर के मुख्य बस स्टैंड के बाहर लगा रैन बसेरा का बोर्ड। - फोटो : Sirsa
विज्ञापन
सिरसा। मुसाफिरों को ठंड से बचाने के लिए सरकार ने रैन बसेरा तो बना दिए लेकिन सार्वजनिक स्थानों से दूर बने होने के कारण इसका सही तरीके से लाभ नहीं मिल पा रहा। मुसाफिर अभी भी ठंड में भी बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और सड़क किनारे रात बिताने को मजबूर हैं। मुसाफिर कहते हैं कि इतनी दूर जाना संभव नहीं है, क्योंकि सामान के चक्कर में आना-जाना दिक्कत पैदा करता है।
विज्ञापन

प्रशासन की ओर से स्थापित किए गए रैन बसेरा की व्यवस्था की हकीकत जानने के लिए टीम ने आधी रात को शहर का दौरा किया। पड़ताल के दौरान पता चला है कि मुसाफिरों के लिए प्रशासन ने रैन बसेरा तो स्थापित कर दिया लेकिन इनका सही से उपयोग नहीं हो पा रहा है। क्योंकि इसे बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन से लगभग 2 किलोमीटर दूर शहर में स्थापित किया गया है। ऐसे में यहां आने वाले यात्री भारी-भरकम सामान के साथ पहले रैन बसेरा तक जाने और फिर वापस रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड तक जाने में परेशानी झेलते हैं। इसलिए जद्दोजहद से बचने के लिए वहीं खुले में रात बिताने को मजबूर हैं।
जानिए, कहां कैसी मिली स्थिति
समय 12.15 मिनट: स्थान बस स्टैंड
बस स्टैंड पर आधी रात कुछ यात्री सोते हुए नजर आए। कुछ यात्री अपने आप को कंबल में लपेटकर ठंड से बचाने का प्रयास कर रहे थे। कैंटीन के पास एक कोने में फर्श पर ही कंबल बिछाकर लेटे हुए यात्रियों बठिंडा के संजय कुमार, पटियाला के मनजीत और फरीदाबाद के दीपक से बात की तो उन्होंने बताया कि रात को आने में लेट हो गए इसलिए जाने वाली बस नहीं मिली। बस का टाइम सुबह का है। उन्हें बताया गया कि यहां रैन बसेरा की सुविधा भी प्रशासन ने दी है तो वहां क्यों नहीं जाते। इस पर उन्होंने कहा कि साहब, सामान ज्यादा है और रैन बसेरा शहर की ओर है। इसलिए सामान के साथ जाने-आने में परेशानी होगी। यदि बस स्टैंड के पास ही रैन बसेरा होता तो रात गुजारने की राह आसान हो जाती।
विज्ञापन

समय : 12: 45 : स्थान : रेलवे स्टेशन
रेलवे स्टेशन पर भी कई यात्री नीचे और टिकट हॉल में बैठे थे। इनमें से कुछ नींद ले रहे थे जबकि कई यात्री मोबाइल चार्ज करने का प्रयास कर रहे थे। उनसे बात की तो पता चला कि गंगानगर के साहब सिंह, बिहार से सीबू राम, बठिंडा से रामू को ट्रेन से जाना है। लेकिन अभी कोई ट्रेन नहीं है। एक यात्री ऐसा था जो ट्रेन से आया था लेकिन उसे बस से आगे जाना था। उन्होंने बताया कि रैन बसेरा नजदीक होता तो शायद चले जाते, लेकिन अब तो यहीं रात गुजारेंगे। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि स्थानीय प्रशासन को यात्रियों के लिए रेलवे स्टेश पर कुछ रजाई, गद्दे और बिस्तर की व्यवस्था करवा देनी चाहिए ताकि कम से कम ठंड से तो बचा जा सके।
अस्थायी रैन बसेरा भी स्थापित करना भूला जिला प्रशासन
दो साल पहले भी इसी तरह की दिक्कत आई थी। उस समय तत्कालीन अधिकारियों ने यात्रियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करते हुए बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन सहित टाउन पार्क के पास अस्थायी रैन बसेरा स्थापित कर दिया था। रोडवेज की बसों को अस्थायी रैन बसेरा के रूप में विकसित किया और गद्दे लगाकर बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और टाउन पार्क के पास खड़ा कर दिया। ताकि यात्रियों को खुले में रात न बितानी पड़े और छत मिल सके। लेकिन इस बार न तो बस स्टैंड पर अस्थायी रैन बसेरा स्थापित किया और ना ही टाउन पार्क के पास। अस्थायी रैन बसेरा ना स्थापित हो, तब उस स्थिति में कम से कम बिस्तर तो उपलब्ध करवाए जा सकते हैं।
समय : 11.50 बजे, स्थान, रैन बसेरा, काठ मंडी, सिरसा
रात के समय काठ मंडी स्थित आर्य स्कूल के सामने बने रैन बसेरा की वास्तविक स्थिति जानने के लिए दौरा किया। रात करीब पौने 12 बजे रैन बसेरा का गेट खटखटाया। गेट खटखटाते ही एक व्यक्ति बाहर आया तो उसने आते ही पूछा कि क्या सेवा कर सकते हैं। उसे बताया गया कि यहां रात गुजारनी है, तो उसने कहा कि ठीक है, आप पहचान पत्र दिखाइये और रजिस्टर में भी पंजीकरण करें। इसके बाद उन्हें बताया तो कर्मचारी हिम्मत सिंह ने बताया कि यहां यात्रियों के लिए सभी प्रकार की सुविधा है। उपयुक्त पहचान पत्र दिखाने के बाद जगह मिल जाती है। उन्होंने बताया कि 2 जनवरी को 2, 3 जनवरी को 1, 4 जनवरी को 5, पांच जनवरी को 8, 7, 8 और 9 जनवरी को 1-1, 10 जनवरी को 5 यात्री यहां ठहरे थे। इसके अलावा 12 और 13 जनवरी को एक-एक और 19 जनवरी को 2 यात्री यहां आए।
अस्थायी रैन बसेरा को लेकर मंथन के बाद करेंगे फैसला : प्रशासक
रैन बसेरा को मैंने स्वयं चैक किया था। सब व्यवस्था ठीक है। लेकिन जैसा आप बता रहे हैं कि अस्थायी रैन बसेरा को लेकर सुविधा देने की बात है तो, इस पर भी नगर परिषद अधिकारियों के साथ मंथन करेंगे। उसके बाद फैसला करेंगे।
-जयवीर यादव, एसडीएम और प्रशासक नगर परिषद, सिरसा।

बस स्टैंड पर कड़कड़ाती ठंड में रात बिताने को विवश यात्री।- फोटो : Sirsa

बस स्टैंड पर कड़कड़ाती ठंड में रात बिताने को विवश यात्री।- फोटो : Sirsa

रेलवे स्टेशन पर रात को समय व्यतीत करते बाहर आए यात्री।- फोटो : Sirsa

रैन बसेरा में रात के समय तैनात कर्मचारी।- फोटो : Sirsa

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें