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पौने तीन लाख की ठगी के तीन आरोपी ग्वालियर से गिरफ्तार

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रोहतक। फर्जी मेडिकल उपकरण कंपनी बनाकर दरियाव नगर के कारोबारी से पौने तीन लाख रुपये ठगने के आरोप में पुलिस ने मध्यप्रदेश के ग्वालियर से तीन युवकों को गिरफ्तार किया है। आरोपी अजय राठौर निवासी माधवपुर जिला मुरैना मध्यप्रदेश हाल नर्सिंग नगर चार शहर नाका ग्वालियर, ब्रिजमोहन निवासी संतर नदीपार टाल गिर्द, ग्वालियर व धर्मेंद्र निवासी सुभाष नगर मुरैना को अदालत में पेश किया गया, जहां से पांच दिन के रिमांड पर लिया गया है।
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साइबर क्राइम थाना प्रभारी इंस्पेक्टर कुलदीप सिंह ने बताया कि 11 मई 2021 को दरियाव नगर निवासी रमेश ने सिविल लाइन थाने में शिकायत दी कि उसने एक मेडिकल उपकरण की फर्म बना रखी है। फर्म चिकित्सा के क्षेत्र में प्रयोग किए जाने वाले उपकरण बेचती है। उसका ऑनलाइन मेडिकल उपकरण का कारोबार करने वाली कंपनी से संपर्क हुआ। मोबाइल पर बातचीत होने पर रमेश ने 97 हजार 500 रुपये का आर्डर दे दिया। उसे पैसे भेजने के लिए एक खाता नंबर दिया गया। पिछला आर्डर आने से पहले ही 1 लाख 75 हजार रुपये का एक और आर्डर ले लिया गया। साथ ही रमेश ने तत्काल डिलिवरी करने के लिए कहा। आरोपी एक युवक ने कहा कि आपका माल निकल गया है। बाकी एक लाख रुपये और जमा कराने के लिए बोला। रमेश ने दिए गए बैंक खाते में कुल 2 लाख 72 हजार 500 रुपये की राशि जमा करवा दी। इसके बाद न तो माल पहुंचा और मोबाइल नंबर भी बंद हो गया। सिविल लाइन थाना पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया।
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लोकेशन बदलते रहे आरोपी, ग्वालियर में पुलिस ने धर दबोचा
आईजी ने केस की जांच साइबर क्राइम थाना पुलिस को दी। एएसआई सुनील के नेतृत्व में पुलिस ने मोबाइल नंबर का पूरा रिकॉर्ड खंगाला। जांच में पता चला कि मोबाइल नंबर की आईडी गोरखपुर के युवक की है। उसने बताया कि उसके कागजात गुम हो गए थे। उसका पूरे मामले से कोई संबंध नहीं है। जांच आगे बढ़ी तो पुलिस के सामने तीन नाम सामने आए। मध्यप्रदेश पुलिस की मदद से उनकी लोकेशन तलाश की, लेकिन वे लगातार जगह बदलते रहे। अब पुलिस ने दबिश देकर आरोपी अजय राठौर, ब्रिजमोहन व धर्मेंद्र को ग्वालियर से गिरफ्तार कर लिया।
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यूं खड़ा किया फर्जी कागजात पर नेटवर्क
पुलिस के मुताबिक जांच में पता चला है कि यूपी के गोरखपुर निवासी अरुण के कागजात गुम हो गए थे, जो आरोपियों के हाथ लग गए। आरोपियों ने कागजात पर फर्जी तरीके से पहले मोबाइल सिम लिया और इसके बाद बैंक अकाउंट खुलवा लिया। इसके बाद गूगल, जस्ट डायल व दूसरी साइट पर मेडिकल उपकरण बेचने वाली कंपनियों की जानकारी हासिल की। इसके बाद फर्जी कंपनी बनाकर बाजार से सस्ते रेट में मेडिकल उपकरण बेचने की सूचना ऑनलाइन जारी कर दी। झांसे में आने वाले लोगों से सौदा होने पर माल डिलिवरी से पहले पैसे ऑनलाइन फर्जी कागजात पर खुले बैंक अकाउंट में डलवा लेते। पैसे आने के बाद मोबाइल नंबर बंद कर लेते। अब पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपियों ने इस तरह की कितनी वारदात अंजाम दी है।
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