कोरोना की सशंकित तीसरी लहर 1918 में आए स्पेनिश फ्लू की तीसरी लहर की तरह कमजोर पड़ सकती है। क्योंकि सीरो सर्विलांस में प्रदेश की 60.01 फीसदी आबादी में एंटीबॉडी मिली है। यह एंटीबॉडी संक्रमित होने से बनी है या टीकाकरण से, इस बात का फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि एंटीबॉडी कोरोना के संक्रमण से बचाएगी। इसलिए कोरोना से घबराने की नहीं, जागरूक रहने की जरूरत है।
पीजीआईएमएस रोहतक स्थित कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर एवं कोवैक्सीन वैक्सीन रिसर्च की अनुसंधानकर्ता टीम के सदस्य डॉ. रमेश वर्मा ने बताया कि तीसरी लहर शुरू होने से पहले टीका लगवाना जरूरी है। क्योंकि एंटीबॉडी बनने में भी कम से कम 42 दिन लगते हैं। आईसीएमआर की ओर से कराए गए सीरो सर्विलांस की जांच रिपोर्ट पर नजर डालें तो घबराने की जगह जागरूक होने की जरूरत है। प्रदेश की लगभग दो तिहाई जनता के शरीर में एंटीबॉडी बन चुकी है, इसलिए तीसरी लहर दूसरी लहर की तुलना में अधिक खतरनाक नहीं होगी। यह 1918 में आई महामारी स्पेनिश फ्लू की तरह हो सकती है। क्योंकि स्पेनिश फ्लू में भी पहली लहर की तुलना में दूसरी लहर अधिक खतरनाक साबित हुई थी। जबकि तीसरी लहर में वायरस कमजोर पड़ गया था। वर्तमान में जरूरी है कि जितना हो सके जल्द से जल्द सभी टीकाकरण करवाएं। इससे अभी तक संक्रमण से बचे लोगों को भी बचाया जा सकेगा।
बच्चों को लेकर सतर्क रहें
डॉ. रमेश वर्मा ने बताया कि कोरोना की सशंकित तीसरी लहर की देखते हुए बच्चों को लेकर घबराने की अधिक जरूरत नहीं है। सभी को चाहिए कि वह सतर्क रहें, मास्क का प्रयोग करें और सामाजिक दूरी बनाकर रखें। बच्चों में एनजियोटेंसिन कवर्टिंग एन्जाइम एसीई रिसेपटर नहीं होते, इसलिए वायरस उन्हें अधिक परेशान नहीं कर सकता। यहां समस्या यह है कि ये बच्चे बड़ों को संक्रमण जरूर दे सकते हैं। जितनी आयु कम होगी, बच्चे को खतरा उतना ही कम होगा। जो बच्चे बीमार रहते हैं, जिनको कैंसर या कोई गंभीर बीमारी है, उनके लिए खतरा है।
पहली दो लहरों में मिले संक्रमितों का आंकड़ा (प्रतिशत में)
आयु पहली दूसरी
1 से 10 3.28 3.05
11 से 20 8.03 8.57
21 से 30 21.21 22.49
31 से 41 21.23 22.70
41 से 51 17.30 17.26
61 से 71 9.14 8.22
71 से 81 3.70 3.35
81 से 91 0.94 0.88
91 प्लस 0.11 0.13