जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने दोपहिया वाहन एजेंसी संचालक को निर्देश दिए हैं कि वह उपभोक्ता से ज्यादा वसूली गई टैक्स की राशि न केवल लौटाए, बल्कि चार हजार रुपये हर्जाना भी दे।
एडवोकेट सतीश तंवर ने बताया कि उसने जून 2017 में स्कूटी खरीदी थी। इसके लिए उससे 53 हजार 330 रुपये लिए गए, लेकिन बिल 50 हजार 947 रुपये का दिया गया। जब वह आरसी लेने पहुंचा तो उससे 4 हजार 300 रुपये चेक के माध्यम से लिए गए। उसने जब आरटीओ ऑफिस में आरटीआई लगाकर जानकारी मांगी तो पता चला कि वाहन पंजीकरण प्रमाण पत्र का टैक्स 3 हजार 150 रुपये है। जबकि उससे 4 हजार 300 रुपये वसूले गए हैं। आरोप है कि वकील ने शोरूम में जाकर अधिक वसूली गई राशि वापस मांगी। पैसे वापस नहीं मिले तो 2017 में वकील ने जिला उपभोक्ता आयोग में याचिका दायर की। आयोग ने शोरूम मालिक को नोटिस देकर जवाब मांगा। दोनाें पक्षों की बहस के बाद अब आयोग ने फैसला सुनाया है। वकील ने बताया कि आयोग ने शोरूम संचालक को 1 हजार 72 रुपये वापस लौटाने व चार हजार रुपये हर्जाने के तौर पर देने के आदेश दिए हैं।