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Haryana: नए शैक्षणिक सत्र में नया सिलेबस पढ़ेंगे MDU के विद्यार्थी, जानिए क्या होगा बदलाव

Sat, 11 May 2024 10:26 PM IST
भूपेंद्र सिंह विकास सैनी, अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)

सार

नया सिलेबस प्रायोगिक समझ देने वाला और शोध पर केंद्रित रहेगा। एमडीयू का प्रयास शिक्षा का समाज से जुड़ाव पर जोर देना है।
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रोहतक एमडीयू - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एमडीयू व संबंधित कॉलेजों के विद्यार्थियों को नए शैक्षणिक सत्र में नया सिलेबस पढ़ने के लिए मिलेगा। यह सिलेबस किताबी ज्ञान के साथ प्रायोगिक समझ देने वाला होगा। इसमें प्रयोग के जरिए बात समझाने व सिखाने पर जोर दिया जाएगा। साथ ही यह सिलेबस आर्थिक, सामाजिक व राजनीति की समस्याओं के समाधान करने वाला होगा। एनईपी (राष्ट्रीय शिक्षा नीति) के तहत एमडीयू का प्रयास शिक्षा का समाज से जुड़ाव पर जोर देना है।

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इसी कड़ी में एमडीयू में विभिन्न कॉलेजों के शिक्षकों को यहां प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अब तक शिक्षा केवल जानकारी या ज्ञान के लिए रही है। नई शिक्षा नीति में शिक्षा या ज्ञान का समाज की समस्या के समाधान में कैसे उपयोग हो, इस पर जोर दिया गया है। इसमें शिक्षा का समाज से कैसे जुड़ाव हो व आर्थिक, सामाजिक व राजनीतिक समस्याओं का समाधान कैसे करें, मुख्य है। ऐसा सिलेबस बनाने के लिए ही एमडीयू में तीसरी वर्कशॉप की जा रही है। इसमें लाइफ साइंस के 12 विभाग शामिल हैं।

विवि का प्रयास जुलाई में नए सत्र की शुरुआत के साथ ही नया सिलेबस भी तैयार करने का है। इसमें थ्योरी के साथ प्रयोगात्मक तरीके से सिखाने पर जोर दिया जाएगा। इसके तहत विद्यार्थियों को प्रोजेक्ट्स, एसाइनमेंट, इंटर्नशिप कराई जाएगी।
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यह वर्कशाॅप सेंटर फॉर करिकुल डिजाइन डेवलपमेंट, इंटरनल क्वालिटी एश्योरेंस सेल, फैकल्टी डेवलपमेंट सेंटर की ओर से किया जा रहा है। नए सिलेबस में शोध पर फोकस रहेगा। नवाचार यानी इनोवेशन पर भी जोर दिया जाएगा। अच्छे शोध पत्र प्रस्तुत करने व उनका पेटेंट लेने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

एमडीयू नई शिक्षा नीति को लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा चुका है। इसके तहत नए सत्र से नया सिलेबस विद्यार्थियों को दिया जाएगा। यह सिलेबस तैयार करने के लिए कॉलेज स्तर पर भी शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। किताबी ज्ञान के बजाय प्रायोगिक समझ देने वाला सिलेबस तैयार किया जा रहा है। शिक्षा का समाज से जुड़ाव पर नए सिलेबस में विशेष ध्यान दिया जा रहा है। -प्रो. राजबीर सिंह, कुलपति, एमडीयू।

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