सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में मोनू डागर ने शूटर का किया था इंतजाम
लॉरेंस बिश्नोई गैंग का जाल रोहतक में भी फैलने लगा है। गुरुवार को आईएमटी स्थित ट्रांसपोर्टर के कार्यालय में हुई फायरिंग में पंजाब की फरीदकोट जेल में बंद मोनू डागर का नाम सामने आया है, जो बिश्नोई गैंग का शॉर्प शूटर है।
खुलासा हुआ है कि उसके कहने पर ही चार स्थानीय युवाओं ने आईएमटी की ट्रक यूनियन के कार्यालय में अंधाधुंध फायरिंग की है। अब पुलिस मामले में गिरफ्तार अंकित खरावड़ से पूछताछ कर रही है, ताकि फरार आरोपियों तक पहुंचा जा सके।
पुलिस के मुताबिक सोनीपत जिले के गांव रेवली निवासी मोनू डागर के खिलाफ पहले रोहतक में कोई केस दर्ज नहीं है। पहला केस गुरुवार को आईएमटी थाने में दर्ज किया गया है। डागर के खिलाफ पंजाब व हरियाणा में आठ से 10 केस दर्ज हैं। उस पर 1 दिसंबर, 2021 को पंजाब के मोगा के डिप्टी मेयर पर गोली चलाने का आरोप है।
बाद में पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था। तब मोगा के एसपी सुरिंदरजीत मंड ने पत्रकारों को बताया था कि लॉरेंस बिश्नोई गैंग का शॉर्प शूटर मोनू डागर कनाडा में रह रहे गोल्डी बराड़ के कहने पर डिप्टी मेयर के भाई को मारने आया था। साथ ही उन्होंने बताया था कि वह अमृतसर में राणा कंडोवालिया की हत्या में भी आरोपी है। इसके पहले डागर जुलाई, 2015 में सोनीपत जिले के गांव रूखी के मंजीत की हत्या के मामले में प्रियव्रत व मंजीत के साथ नामजद रहा है।
सिद्धू मूसेवाला की हत्या की जांच के दौरान यह बात सामने आई थी कि मोनू डागर ने जेल से गोल्डी बराड़ के कहने पर दो शूटर उपलब्ध कराए थे। उस पर शूटर की टीम बनाने में भी मदद करने का आरोप है। हालांकि रोहतक पुलिस का कहना है कि यह तो पंजाब पुलिस ही बता सकती है।
पैसे का लालच देकर जोड़ा जा रहा गैंग से
सीआईए पुलिस ने आईएमटी में हुई फायरिंग में खरावड़ निवासी अंकित को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में खुलासा हुआ है कि अंकित पहले सांपला तहसील में टाइपिस्ट का काम करता था। बहन की शादी हो चुकी है, जबकि घर पर मां है। सांपला तहसील में ही वह गैंग के संपर्क में आया। गैंग के सदस्यों ने उसे लालच दिया कि उनका साथ देने पर जो कर्ज है, वह उतर जाएगा। पुलिस का मानना है कि गैंग युवाओं को लालच देकर अपने साथ जोड़ रहा है।
एक जनवरी को गांधरा में हुई फायरिंग में रहा हाथ
पुलिस के मुताबिक एक जनवरी को गांधरा गांव में हवाई फायरिंग हुई थी। आईएमटी में फायरिंग करने में शामिल चार युवकों में से तीन उसमें शामिल थे। अब पुलिस उस वारदात में भी गिरफ्तार आरोपी अंकित से पूछताछ करेगी।
तीन घंटे में ही एक आरोपी को किया गिरफ्तार
पुलिस को जांच में सीसीटीवी कैमरे की फुटेज मिली। फुटेज में चारों युवक साफ दिखाई दे रहे थे। तत्काल सीआईए प्रथम के एएसआई विनोद दलाल के नेतृत्व में एएसआई संत कुमार, दिनेश कुमार, मुख्य सिपाही प्रदीप, मुख्य सिपाही प्रवीण, मुख्य सिपाही महावीर, सिपाही नरेंद्र व सिपाही नितेश की टीम ने दबिश देरी शुरू कर दी। तीन घंटे बाद खरावड़ निवासी अंकित को दबोच लिया गया। अब उसे शुक्रवार को अदालत में पेश कर रिमांड पर लेने का प्रयास किया जाएगा। पुलिस की त्वरित कार्रवाई पर एसपी उदय सिंह मीना ने सीआईए की टीम की पीठ थपथपाई है।
जितेंद्र ने कहा था डागर को, मैं तो छोटा सा ट्रांसपोर्टर हूं
यूनियन प्रधान जितेंद्र ने बताया कि जब उसको दो बार फोन आया तो लगा कि कोई बेवजह दबाव बना रहा है। इस कारण पुलिस में शिकायत नहीं दी। अपने स्तर पर जांच करवाई तो पता चला कि फोन पंजाब की फरीदकोट जेल से आया था। उसने फोन पर मोनू डागर से कहा था कि वह तो छोटा सा ट्रांसपोर्टर है। किसी ने गलत सूचना दी है। बावजूद इसके डागर अंजाम भुगतने की धमकी देता रहा।
घटनास्थल पर मिले तीन जिंदा कारतूस
पुलिस को जांच में पता चला कि यूनियन कार्यालय में 12 राउंड फायरिंग हुई है, जिसमें मौके पर नौ खाली खोखे व तीन जिंदा कारतूस मिले हैं। इतना ही नहीं, हमलावरों ने मुंशी सुरेश को तीन व रामनिवास को एक गोली मारी। दोनों को पैरों में गोली मारी गई है। इससे लग रहा है कि हमलावर दहशत फैलाना चाहते थे। हत्या का मकसद नहीं लगा।
डागर बोला, मैं बिश्नोई गैंग से हूं, यूनियन के कार्यालय में फायरिंग हो गई
पुलिस के मुताबिक जितेंद्र ने बयां किया कि पहले उसके पास 31 दिसंबर को फोन आया। उस समय डागर को साफ कह दिया था कि यह यूनियन का काम है। बोला, वह बिश्नोई गैंग से है। मेरा हिस्सा कर ले नहीं तो तेरे लिए अच्छा नहीं होगा। जितेंद्र ने कहा कि उसके पास कोई काम नहीं है। ये यूनियन का काम है। उसने साफ मना कर दिया। डागर बोला, जो नुकसान होगा, उसका तू जिम्मेदार रहेगा। दो-तीन दिन में मना करने का परिणाम देख लेना। इसके बाद 17 जनवरी को कॉल करके बोला, तुम्हारे ऑफिस पर गोलियां चला दी है। अब बता हिस्सा करना या नहीं। उसको दोबारा समझाया कि उनके पास इतना काम नहीं है। किसी आदमी को भेजकर जांच करवा ले।
हमलावर ड्राइवरों से बोले, तुम्हारा प्रधान कहां है
गुरुवार को चार युवक करीब पौने 12 बजे यूनियन कार्यालय पहुंचे। उस समय ड्राइवर बैठकर कर रहे थे। युवकों ने कहा कि तुम्हारा प्रधान कहां है। उन्होंने कहा कि अंदर आफिस में बैठा होगा। ये सुनकर युवक अंदर गोलियां चलाते हुए गए। अंधाधुंध फायरिंग से कार्यालय गूंज उठा। दीवारों से टकराकर गोलियां नीचे फर्श पर पड़ रही थीं। तीन गोली यूनियन के मुंशी सुरेश राणा निवासी पाकस्मा व एक गोली ड्राइवर बलियाना निवासी रामनिवास को लगी। इसके बाद हमलावर हवाई फायरिंग करते हुए फरार हो गए। कहकर गए कि आज तो प्रधान बच गया। फिर देख लेंगे।
अचानक ताबड़तोड़ फायरिंग से चौंक गए घायल
घायल सुरेश व रामनिवास ने बताया कि उनको अंदेशा नहीं था कि अचानक यूं फायरिंग हो जाएगा। सुरेश यूनियन की गाड़ियों का रिकॉर्ड देख रहा था। जबकि रामनिवास पास बैठा था। अचानक युवक अंधाधुंध फायरिंग करते हुए आए। तब तक कुछ समय में आता, तीन गोलियां लगने से सुरेश व एक गोली लगने से रामनिवास घायल हो गया। हालांकि हमलावरों ने उनकी हत्या के इरादे से गोलियां नहीं मारी।