सिविल अस्पताल में आक्सीजन प्लांट सुचारु करने का रास्ता साफ हो गया है। आक्सीजन की गुणवत्ता जांच के साथ ही प्लांट का ट्रायल भी कर लिया गया है। गुरुग्राम से कराई गई सैंपल रिपोर्ट में आक्सीजन की गुणवत्ता 97 प्रतिशत शुद्ध मिली है। वहीं समालखा का ऑक्सीजन प्लांट अभी तैयार नहीं है। अब तक वहां मशीनें भी नहीं लग सकी हैं।
पानीपत में तैयार किया गया प्लांट हवा से प्रति मिनट 1000 लीटर ऑक्सीजन तैयार करेगा। इससे 150 बेड को 24 घंटे ऑक्सीजन आपूर्ति की जा सकेगी। इस प्लांट को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की ओर से डिजाइन किया गया है। लार्सन एंड टर्बो (एलएंडटी) कंपनी ने कारपोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी (सीसीआर) के तहत यह प्लांट पीएम केयर्स फंड में डोनेट किया है।
ऐसे बनती है हवा से ऑक्सीजन
वातावरण से हवा को कंप्रेस किया जाता है। फिल्टर की मदद से इसे शुद्ध कर ठंडा किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में हवा में मौजूद ऑक्सीजन लिक्विड में तब्दील हो जाती है, जिसे स्टोर किया जाता है। कुछ प्लांट लिक्विड में तो कुछ गैस के रूप में ऑक्सीजन तैयार करते हैं।
हवा में 21 फीसद ऑक्सीजन
ऑक्सीजन हवा और पानी दोनों में मौजूद होती है। हवा में 21 फीसद ऑक्सीजन, 78 फीसद नाइट्रोजन और एक फीसद अन्य गैसें जैसे हाइड्रोजन, नियोन, जीनोन, हीलियम और कार्बन डाईआक्साइड होती हैं।
एक व्यक्ति को एक दिन में चाहिए 550 लीटर ऑक्सीजन-
डॉ. सुदीप सांगवान ने बताया कि सामान्य तौर पर एक व्यक्ति को 24 घंटे में करीब 550 लीटर शुद्ध ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। स्वस्थ व्यक्ति एक मिनट में 12 से 20 बार सांस लेता है। उसके ब्लड में ऑक्सीजन का सैचुरेशन लेवल 95 से 100 फीसदी के बीच होना चाहिए। ऑक्सीजन लेवल 90 से नीचे होने पर उसे कृत्रिम ऑक्सीजन दी जाती है।
ऑक्सीजन की जांच करा ली है- डॉ. संजीव
ऑक्सीजन की गुणवत्ता के लिए सैंपल गुरुग्राम भेजे गए थे। वहां से सैंपल की रिपोर्ट आ गई है। ऑक्सीजन की गुणवत्ता सही पाई गई है। प्लांट अब सेवा में लाने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
--डॉ. संजीव ग्रोवर, पीएमओ सिविल अस्पताल