ानीपत। यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहीं सेक्टर-13,17 निवासी और राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी मोनिका मान किसी तरह जान बचाकर स्लोवाकिया पहुंच गई हैं। यूक्रेन में पांच दिन तक उन्हें और उनके साथियों के ट्रेन में ही नहीं बैठने दिया गया।
वीडियो कॉल में मोनिका ने बताया कि पांच दिन तक बंकर में छिपने के बाद स्लोवाकिया पहुंचकर उन्होंने जान बचाई है। वह यूक्रेन में डनीप्रो के बंकर में रह रही थीं। उन्होंने बताया कि बताया कि यूक्रेन के लोग उन्हें एवं उनके सात साथियों को ट्रेन में नहीं बैठने दे रहे थे। वे रोज रेलवे स्टेशन जाते लेकिन उन्हें ट्रेन में नहीं बैठने दिया जाता था। बंकर में भूखे प्यासे रहे, सारा खाना खत्म हो चुका था। मोनिका ने बताया कि वह स्कूल के दिनों में जिले की हॉकी टीम की कप्तान रह चुकी हैं। इसके साथ ही राष्ट्रीय स्तर की कई हॉकी चैंपियनशिप में टीम का हिस्सा रह चुकी हैं।
तीन दिन तक नहीं है फ्लाइट, स्लोवाकिया में ही रहना पड़ेगा
वीडियो कॉल पर मोनिका मान ने ‘अमर उजाला’ से खास बातचीत में बताया कि वह काफी मशक्कत के बाद स्लोवाकिया तो पहुंच गईं लेकिन यहां आकर पता चला कि भारत के लिए अगले तीन दिन तक कोई फ्लाइट नहीं है। यूक्रेन में युद्ध के कारण स्लोवाकिया में राशन दो से तीन गुणा महंगा हो गया है। उनके पास ज्यादा पैसे भी नहीं बचे हैं।
मां सुनीता की सरकार से गुहार बेटी को वापस लाएं
वीडियो कॉल पर बात करने के बाद मोनिका के परिवार के लोग और भी परेशान हो गए हैं। मां सुनीता ने सरकार से गुहार लगाई है कि उनकी बेटी को जल्द देश वापस लाया जाए। मोनिका ने वीडियो कॉल पर मां को दिलासा दिया कि वह जल्द ही देश आ रही हैं, परेशान नहीं हों।
तीन महीने पहले ही यूक्रेन पढ़ने गया था दीपक, लौटा घर
तीन महीने पहले ही यूक्रेन में एमबीबीएस में दाखिला लेने के बाद सेक्टर-18 निवासी दीपक नेहरा सुुरक्षित अपने घर वापस आ गए हैं। दीपक का सपना था कि वह डॉक्टर बनकर लोगों का इलाज करें। भारत में महंगी फीस होने के कारण यूक्रेन में दाखिला लिया लेकिन तीन महीने बाद ही यूक्रेन और रूस में युद्ध शुरू हो गया। दीपक रूस बॉर्डर से दो सौ किलोमीटर की दूर थे, जिसकी वजह से वह सही समय पर यूक्रेन सके। दीपक के पिता देवेंद्र और माता गीता ने उसके भारत न आने तक चिंता में खाना पीना बंद कर दिया था। अब परिवार में खुशी का माहौल है।