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सड़क हादसे में युवक घायल, 10 दिन बाद अस्पताल में उपचार के दौरान मौत

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दिल्ली पैरलल नहर किनारे सड़क हादसे में घायल युवक की 10 दिन बाद अस्पताल में मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल पर आरोप लगाए कि मौत बुधवार रात 11 बजे ही हो गई थी, लेकिन बिल बढ़ाने के लिए शव को वेंटिलेटर पर रखा गया। वीरवार को दूसरे अस्पताल से डॉक्टर बुलाकर जांच कराने के आधे घंटे के अंदर ही उसे मृत घोषित कर दिया गया।
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मूलरूप से तमिलनाडु के जिले नायक्कल निवासी चंद्रशेखर ने बताया कि उसका भजीजा नंद कुमार विराट नगर में किराए के मकान में रहता था। वह कावेरा कंपनी में काम करता था। छह अक्तूबर को ऑफिस से घर लौटते वक्त सड़क हादसे में घायल हो गया था। उसे मॉडल टाउन स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। आरोप है कि बुधवार रात 11 बजे उन्होंने नंद कुमार को चेक किया था तो उसकी सांस नहीं चल रही थी, लेकिन डॉक्टर ने कहा कि वह ठीक है।
आम आदमी पार्टी के शहरी अध्यक्ष प्रीतपाल ने बताया कि वह वीरवार शाम डॉक्टर के पास गए और दूसरे अस्पताल से डॉक्टर बुलाकर नंद कुमार की जांच कराने के लिए कहा। जिसके आधे घंटे बाद ही उसे मृत घोषित कर दिया गया।
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बिल जमा नहीं होने पर शव देने से किया इंकार
आप पार्टी के जिला अध्यक्ष सुखबीर मलिक ने बताया कि डॉक्टर ने परिवार को धमकी दी कि बिल जमा कराए बगैर शव नहीं ले जाने देंगे। जिस पर वह शुक्रवार सुबह दस बजे वह अस्पताल पहुंचे। उन्होंने अस्पताल की मैनेजमेंट से बात करने का प्रयास किया, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। जिस पर प्रदर्शन किया, तब शव को उठाने दिया गया।
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