चंडीगढ़। हरियाणा में धान के सीजन में इस बार पराली जलाने के मामले पिछले साल के मुकाबले कम सामने आए हैं। अब तक प्रदेश में कुल 24 स्थानों पर पराली जलाई गई है। वहीं, पंजाब में इसके मुकाबले करीब 11 गुना अधिक मामले सामने आ चुके हैं।
हरियाणा में जिला स्तर पर पराली जलाने से रोकने के लिए कमेटी बनाई गई है। साथ ही सरकार की ओर से 13 संवेदनशील जिलों के 199 गांवों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। इनके अलावा, हरसेक के माध्यम से भी सैटेलाइट के जरिये पराली जलाने के मामलों पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है।
कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 15 सितंबर से 4 अक्तूबर तक हरियाणा में मात्र 24 स्थानों पर धान की पराली जलाई गई है। इनमें कुरुक्षेत्र में सबसे अधिक 13, करनाल में 5, कैथल 2, अंबाला, फतेहाबाद, सोनीपत और यमुनानगर में 1-1 स्थान पर पराली जलाने की रिपोर्ट हुई है। वर्ष 2020 के मुकाबले यह केस काफी कम हैं, पिछली बार अब तक 160 केस रिपोर्ट किए जा चुके थे।
पंजाब की बात करें तो इस बार इसी अवधि में 260 स्थानों पर पराली जलाई गई है। इनमें अमृतसर में 161, फरीदकोट 9, लुधियाना 19, पटियाला 11, तरनतारन 34, फिरोजपुर 5, गुरदासपुर-संगरूर 4, कपूरथला 2, जालंधर 6, एसबीएस नगर, रूपनगर, मुक्तसर, फाजिल्का, फतेहगढ़ साहिब में 1-1 पराली जलाने का मामला सामने आया है। इसी अवधि में पिछले साल पंजाब में 1603 स्थानों पर पराली जलाना पाया गया था।
250 करोड़ रुपये खर्च कर रही सरकार
पराली प्रबंधन को लेकर इस बार हरियाणा सरकार 250 करोड़ खर्च कर रही है। इसके तहत किसानों को 50 से 80 प्रतिशत तक सबसिडी पर पराली प्रबंधन को मशीनें उपलब्ध करा रही है। पिछले तीन साल में 60 हजार के करीब उपकरण किसानों को दिए जा चुके हैं, इस बार 16 हजार और मशीनों की मांग रखी गई है। इसके अलावा, करीब 200 स्थानों पर पराली प्रबंधन के लिए प्लांट लगाए जा रहे हैं।
पराली जलाने के मामले में संवेदनशील 13 जिलों के 199 गांवों में 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है। साथ ही हरसेक के माध्यम से लगातार नजर रखी जा रही है। जिन किसानों ने पराली जलाई है, उनको 5 हजार रुपए जुर्माना किया जा रहा है। किसानों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। इसी का परिणाम है इस बार पराली जलाने केस कम हैं। उम्मीद है कि इस बार परिणाम सकारात्मक रहेंगे। -डा. सुमिता मिश्रा, एसीएस, कृषि विभाग।