पने परिवार के साथ ऑल इंडिया पांचवी रैंक लाने वाले सुयश अरोड़ा
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राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) का परिणाम सोमवार की शाम घोषित हुआ। इस बार परिणाम विद्यार्थियों को सीधे ई-मेल के जरिए भेजे गए। नीट में पंचकूला के सेक्टर-11 निवासी सुयश अरोड़ा ने ऑल इंडिया पांचवीं रैंक हासिल है। उन्हें 720 में से 715 अंक मिले हैं। वहीं, शिशु निकेतन में पढ़ने वाली चंडीगढ़ की पवित ने ऑल इंडिया 23वीं रैंक हासिल की है। वहीं, चंडीगढ़ के ही आदित्य गर्ग की 197वीं रैंक आई है।
राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) की ओर से परिणाम दो दिन पहले ही जारी किए जाने थे, लेकिन किन्हीं कारणवश देर हो गई। छात्र परिणाम का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। जैसे ही परिणाम विद्यार्थियों को मेल के जरिए प्राप्त होने लगे तो उनके चेहरे की चमक तेज हो गई। नीट में इस बार ट्राइसिटी से लगभग 25 हजार विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया था। परिणाम पिछले वर्ष के मुताबिक ही रहे हैं।
पिता के बाद मां ने पाला, 11वीं से ही सुयश जुट गए थे तैयारी में
ऑल इंडिया पांचवीं रैंक लाने वाले सुयश अरोड़ा कहते हैं कि कक्षा 11 से ही वह नीट की तैयारी में जुट गए थे। प्रतिदिन पांच से सात घंटे की पढ़ाई की। पिता महेश अरोड़ा वर्ष 2012 में उन्हें छोड़कर दुनिया से चले गए। उनके बाद मां सीए रेनू अरोड़ा पर ही उनकी सारी जिम्मेदारी आ गई। सुयश ने पंचकूला के भवन विद्यालय से बारहवीं की पढ़ाई की है। सुयश का कहना है कि रैंक के मुताबिक, वह एम्स दिल्ली से एमबीबीएस करेंगे। वहां उनका नंबर आ जाएगा। परिणाम से वह बेहद खुश हैं। सुयश का कहना है कि जिंदगी में पढ़ाई के साथ-साथ खेलना भी जरूरी है। साथ ही अच्छे दोस्त भी जरूरी हैं। मैं पढ़ाई के साथ-साथ खेलने के लिए भी समय निकालता था और दोस्तों के साथ भी कुछ समय बिताता था। कोविड के दौरान पढ़ाई कुछ प्रभावित हुई थी लेकिन परिवार ने पूरा साथ दिया। उन्होंने युवाओं से कहा कि जिंदगी में कभी घबराएं नहीं। उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। बस लक्ष्य तय करके धीरे-धीरे आगे बढ़ते रहें। सफलता अवश्य मिलेगी। मेरा यह पहला ही प्रयास था, जिसमें सफलता मिली।
घंटों की परवाह किए बिना की पढ़ाई : पवित
पवित ने बताया कि पढ़ाई करते समय उन्होंने कभी घंटों की परवाह नहीं की, न ही कोई एक तय शेड्यूल बनाया था। टॉपिक के अनुसार पढ़ाई की, जिसमें यूट्यूब ने भी काफी मदद की। पढ़ाई के दौरान टीवी भी देखा। पढ़ाई का तनाव नहीं लिया। पवित की मां डॉ. ब्रह्मजोत और पिता डॉ. भवनीत दोनों डॉक्टर हैं। पवित ने बताया कि मां के घर आने के बाद वह कई बार उनके साथ पढ़ती थीं। उनकी इस कामयाबी के पीछे दादा और दादी का भी काफी अहम रोल है। पवित दो साल से परीक्षा की तैयारी कर रहीं थीं। वह आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली एम्स में दाखिला लेना चाहती हैं।
ई-मेल पर नतीजे आने से विद्यार्थी हुए परेशान
नीट के नतीजे (स्कोर कार्ड) ई-मेल पर जारी होने की वजह से विद्यार्थियों को काफी परेशानी हुई। कई छात्रों ने आरोप लगाया कि नतीजे आधे-अधूरे हैं। ई-मेल पर नतीजे भेजने की वजह से वह नतीजे नहीं देख पाए। कई विद्यार्थियों अपना ई-मेल याद नहीं कर पाए तो कइयों को नतीजे मिले ही नहीं। ऐसे में बच्चों को नतीजे देखने में काफी परेशानी हुए।