पंजाब के दुर्गम व पिछड़े इलाकों में सेवा देने वाले आवेदकों को एमडी व एमएस कोर्स में दाखिले के समय इस सेवा का लाभ देने से इनकार करने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने याचिका पर पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर पूछा है कि लाभ से इनकार के फैसले पर क्यों न रोक लगा दी जाए।
याचिका दाखिल करते हुए डा. नरेंद्र सिंह ने सीनियर एडवोकेट अमित झांझी व एडवोकेट अभिषेक कुमार प्रेमी के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि पंजाब सरकार ने सेवा के लिहाज से शहरों को 4 श्रेणी में बांटा है।
सरकार ने नियम बनाया था कि श्रेणी सी में साढ़े 4 साल व श्रेणी डी जो दुर्गम क्षेत्र में आता है, उसमें 3 साल सेवा देने वालों को अंकों का लाभ दिया जाएगा। याची ने बताया कि उन्होंने इन श्रेणियों में कार्य किया, लेकिन सरकार से जब एनओसी मांगी गई तो स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव ने इससे इनकार कर दिया। याची ने हाईकोर्ट को बताया कि 26 अगस्त 2020 को सरकार ने शहरों की श्रेणियों को बदला था और इसे पिछली तारीख से लागू कर दिया।
इसके चलते याची के शहरों की श्रेणी सी और डी से बदल कर ए और बी हो गई। याची ने कहा कि इस प्रकार किसी फैसले को पिछली तारीख से कैसे लागू किया जा सकता है। हाईकोर्ट ने याची पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद याचिका पर पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। साथ ही पंजाब सरकार से पूछा है कि याची को एनओसी जारी न करने के आदेश पर क्यों न रोक लगा दी जाए।