क्रशर कब्जाने के मामले में दस्तावेजों से छेड़छाड़ कर बरगलाने का खुलासा हुआ है। आरोपी पक्ष ने ऐसे दस्तावेज पेश किए है, जिनकी जांच से पता चला है कि क्रशर की रेंट डीड खत्म होने के बाद पैसों की अदायगी की गई।
यही नहीं कैंसिलेशन डीड भी बनाई गई है और असल मालिक को उसके क्रशर का कब्जा दिया गया। जबकि, कोर्ट के आदेशों पर सेक्टर-5 थाने में दर्ज एफआईआर में क्रशर मालिक आरोप लगा रहे हैं कि उनके साथ धोखाकर क्रशर रघुबीर चौधरी और बलबीर चौधरी ने अपने नाम करा लिया।
चौधरी एंड कंपनी के मालिक रघुबीर चौधरी ने बताया दिनेश साहनी का क्रशर 16 अक्तूबर 2007 से 28 फरवरी 2013 तक उनके पास लीज पर था।
लीज खत्म होने से कुछ दिन पहले 15 जनवरी 2013 को ही कब्जा दिनेश साहनी को दे दिया गया था और कैंसिलेशन डीड भी बनी। इसके अलावा साढ़े तीन लाख की पूरी अदायगी भी की गई।
चौधरी के मुताबिक, क्रशर में तीन पार्टनर हैं, जिसमें दिनेश, उनकी मां व पिता शामिल हैं। पैसों की अदायगी होने के बाद दिनेश की मां ने भी एफिडेविट दिया कि उनके पैसों की अदायगी हो चुकी है और चौधरी एंड कंपनी पर कुछ बकाया नहीं है।
रघुबीर चौधरी ने आरोप लगाया है कि संभव है कि पर्यावरण विभाग के किसी कर्मचारी के साथ मिलीभगत कर कैंसिलेशन डीड व अन्य दस्तावेजों से छेड़छाड़ की गई। चौधरी के मुताबिक, क्रशर का मालिकाना हक दिनेश के पास है। इससे संबंधित सभी दस्तावेज जांच के दौरान आर्थिक अपराध शाखा में भी दिए गए हैं। फिलहाल मामले की जांच जारी है।
क्या है मामला
सेक्टर-8 निवासी दिनेश ने सेक्टर-2 निवासी रघुबीर चौधरी, उनके भाई बलबीर चौधरी व एक अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी से बुर्ज कोटियां स्थित क्रशर अपने नाम कराने का आरोप लगाया है, जिन पर कोर्ट के आदेशों से मामला दर्ज हुआ है। उससे पहले आर्थिक अपराध शाखा में भी मामले की जांच जारी है।