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एचसीवीवी का कारनामा: बिना विज्ञापन और इंटरव्यू के लगाए प्रोफेसर

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हरियाणा केंद्रीय विश्व विद्यालय भवन। - फोटो : Narnol
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हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय(हकेंविवि ) का नया कारनामा सामने आया है। विवि प्रशासन ने बिना विज्ञापन जारी तथा इंटरव्यू के एसोसिएट प्रोफेसर लगा दिए। कुछ लोगों ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के पास विवि प्रशासन के खिलाफ शिकायत की हुई है जिसकी जांच यूजीसी और केंद्रीय शिक्षा विभाग कर रहा है। जांच में विवि प्रशासन को भर्ती का जारी किया गया विज्ञापन दिखाना होगा। इसकी रिपोर्ट लगभग एक महीने में आएगी। जांच के बाद ही वास्तविकता का पता चल पाएगा। इसके अलावा कुछ अन्य जांचें भी यूजीसी की ओर से की जा रही हैं।
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बता दें कि केंद्र सरकार द्वारा बनाए राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग की टीम 18 अगस्त को डॉ. सुधा यादव के नेतृत्व में हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय पहुंची। इस दौरान शिकायतकर्ता से उनकी शिकायतें सुनीं। इसके अलावा विश्वविद्यालय के अधिकारी एवं संबंधित अधिकारियों ने शिकायत कर्ताओं के दस्तावेज भी दिखाए। लगभग पांच घंटे तक चली जांच के बाद आयोग ने इस रिपोर्ट शिक्षा मंत्रालय को सौंप दिया था। टीम में डॉ. सुधा यादव, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के संयुक्त सचिव डॉ.जीसी चौहान, केंद्र के शिक्षा मंत्रालय के निदेेशक विश्वजीत, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की ओर से वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राजेश यादव, सदस्य कौशलेंद्र पेटल, वरिष्ठ सलाहकार एडवोकेट हर्षित, आयोग के चेयरमैन के निजी सचिव दिनेश साहनी शामिल थे।
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग की सदस्य डॉ. सुधा यादव ने बताया कि किसी भी विश्वविद्यालय को शिक्षकों या अन्य स्टाफ की भर्ती के लिए यूजीसी की अनुमति आवश्यक होती है। उसके बाद विवि को विज्ञापन जारी करना होता है। बाद में इंटरव्यू भी लिया जाता है। इस प्रक्रिया के तहत भर्ती की कार्रवाई पूरी करनी होती है लेकिन हकेंविवि में 9-10 लोग एसोसिएट प्रोफेसर ऐसे लगे हुए है जिनकी भर्ती का न तो विज्ञापन जारी किया और न ही उनका इंटरव्यू हुआ। जिसकी जांच चल रही है। इसके अलावा रोस्टर की भी जांच चल रही है।
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डॉ. सुधा यादव ने बताया कि विश्वविद्यालय खोले जाने के बाद कुछ टीचर्स एडहॉक(कार्यवाहक) पर लगाए गए थे। बाद में भर्ती निकलने पर वो स्थायी हो गए थे। इस दौरान कुछ शिक्षक प्राइवेट विवि और कॉलेज से आकर लगे थे। प्रमोशन के दौरान हकेंविवि प्रशासन ने प्राइवेट विवि और कॉलेज से आए शिक्षकों को उनकी पीछे की नौकरी दिखाकर प्रमोशन दे दिया गया जबकि एडॉक पर तीन वर्ष काम किया शिक्षकों का अनुभव सर्विस रिकॉर्ड में नहीं जोड़ा और उनका प्रमोशन नहीं दिया गया था। आयोग ने इसकी जांच कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार को दी थी। प्रो. टंकेश्वर कुमार ने उनकी यह समस्या हल कर दी है। उनकी एडहॉक पर लगी सर्विस अब जोड़ी जाएगी। इसके लिए शिक्षकों के दस्तावेज भी मंगवाए गए हैं।
9-10 लोग बिना विज्ञापन जारी किए और बिना इंटरव्यू के लग जाना चिंता का विषय है जिसमें ओबीसी का एक भी उम्मीदवार नहीं है। इसकी शिकायत हमारे पास आई हुई है। इसकी जांच एचआरडी मिनिस्ट्री और यूजीसी के द्वारा की जा रही है। जांच में एक-एक चीज चेक की जाएंगी। एक महीने में इसकी रिपोर्ट आएगी। -सुधा यादव, सदस्य, राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग।
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