पिता ने तांगा हांक-हांक कर कुछ कर गुजरने की प्रेरणा दी और बेटी रानी रामपाल ने एक छोटे से शहर से निकल कर उनका नाम पूरी दुनिया में चमका दिया। पढ़ें रानी रामपाल के हॉकी 'क्वीन' बनने की रोचक कहानी...
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रानी रामपाल
भारतीय हॉकी टीम की कप्तान रानी रामपाल के लिए 2020 स्वर्णिम रहा है। 30 जनवरी, 2020 को जहां रानी ने वर्ल्ड गेम्स एथलीट ऑफ द ईयर जीता था, वहीं इसी वर्ष रानी को देश के चौथे सबसे बड़े नागरिक पुरस्कार पद्मश्री के लिए चुना गया था। अब रानी रामपाल के नाम की सिफारिश राजीव गांधी खेल रत्न अवार्ड के लिए की गई है। रानी रामपाल के नाम की सिफारिश खेल रत्न के लिए किए जाने से खेल जगत में खुशी है और रानी के परिजन भी बेहद खुश है।
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रानी रामपाल
रानी रामपाल अर्जुन अवार्ड व हरियाणा के सर्वोच्च भीम अवार्ड को पहले से ही अपनी सफलताओं के खाते में जोड़ चुकी है। पिछले कई वर्षों से भारतीय महिला हॉकी ने रानी की कप्तानी में बेहद बढ़िया परिणाम दिए हैं। वर्ष 2017 में रानी की अगुवाई में भारतीय टीम ने एशियाई कप में सशक्त जीत हासिल की थी और वर्ष 2018 में रजत पदक जीता था। एफआईएच में रानी के निर्णायक गोल से भारतीय टीम ओलंपिक क्वालीफायर्स कर सकी।
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रानी रामपाल
बदल दिए परिवार के हालात
रानी रामपाल की हॉकी की दुनिया में आने की शुरूआत की बात की जाए तो वह समय रानी के लिए बेहद गरीबी वाला था। रानी के घर को देखकर कोई अंदाजा नहीं लगा सकता था कि शाहाबाद कस्बा के माजरी मौहल्ला के घोड़ा घाड़ी चलाने वाले रामपाल की बेटी एक दिन सचमुख में देश की रानी बेटी बनेगी। रानी ने वह कर दिखाया, जिसे देखकर हर पिता यह कह सकता है कि जिसकी बेटी देश का गौरव, उससे बड़ी अमीर और कौन।
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रानी रामपाल
पिता ने खिलाड़ियों को देख बेटी को भेजा था मैदान में
रानी के संघर्ष की कहानी पिता की मेहनत के साथ शुरू हुई थी। रानी के पिता शाहाबाद की सड़कों पर घोड़ा घाड़ी चलाया करते थे और अक्सर महिला हॉकी खिलाड़ियों को आते-जाते देखते थे। बस यहीं से पिता के दिल में बेटी को खिलाड़ी बनाने की चाह जाग उठी और वह 6 वर्षीय बेटी को एसजीएनपी स्कूल के हॉकी मैदान में कोच बलदेव सिंह के पास छोड़ जाए। जहां से रानी की हॉकी की स्वर्णिम शुरूआत हुई।
यह बेहद रोमांचकारी है कि उस समय रानी के घर में अलार्म वाली घड़ी भी नहीं हुआ करती थी और पिता रामपाल व माता राममूर्ति तारों की छांव से अंदाजा लगाकर बेटी को उठाते और हॉकी मैदान में भेजा करते थे। रानी रामपाल उस शाहबाद से हैं, जिसे ‘हरियाणा का संसारपुर’ (संसारपुर पंजाब में है और हॉकी के लिए मशहूर है) कहा जाता है। जब भारतीय महिला हॉकी टीम के लिए रानी का चयन हुआ, तब वे सिर्फ 14 साल की थीं और टीम की सबसे युवा खिलाड़ी थीं।