कुशोत्पाटिनी सोमवती अमावस पर हजारों श्रद्धालु ब्रह्मसरोवर, सन्निहित सरोवर और पिहोवा के सरस्वती तीर्थ पर पहुंचे। यहां उन्होंने पवित्र सरोवर में स्नान करके अपने पूर्वजों की आत्मिक शांति के लिए पूजा अर्चना, गति कर्म, पिंडदान और तर्पण किया। अल सुबह ही पंजाब, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश सहित अन्य राज्य से श्रद्धालु पहुंचना शुरू हो गए थे।
हालांकि सोमवार को दोपहर के बाद ही अमावस शुरू हुई, मगर तीर्थों पर रविवार को ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। सुबह श्रद्धालुओं ने पवित्र सरोवर में स्नान करके पूजा अर्चना करके पूर्वजों के लिए अक्षय मोक्ष की कामना की। तीर्थ पुरोहित आशीष चक्रपाणी ने बताया कि इस अमावस पर सरस्वती तीर्थ पर अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान, गति और नारायण बलि जैसे धार्मिक कार्य करने का महत्व बिहार के गयाजी से भी अधिक है। सरस्वती तीर्थ पर अन्न से बने पिंडों को मृत जीव का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है और तत्पश्चात उन पिंडों का जल में तर्पण किया जाता है। वैसे तो पूरे साल श्रद्धालु पिंडदान कराने के लिए यहां आते हैं, लेकिन सोमवती अमावस पर यहां अधिक तादाद में श्रद्धालु पहुंचते हैं। यह अमावस पवित्र नदियों में स्नान करने, दान तथा पितृ कर्म के लिए श्रेष्ठ है। वहीं, तीर्थ पुरोहित विनोद पचौली ने बताया कि कुशोत्पाटिनी अमावस पर उखाड़ कर रखी गई कुशा को पूरे वर्ष काम आएगी। इस कुशा का हर शुभ कार्य में प्रयोग कर सकते हैं। इसलिए इसे कुशोत्पाटिनी अमावस भी कहा जाता है। यह अमावस पितृ तथा देव कार्य के लिए शुभ मानी गई है। आज मंगलवार को भी अमावस रहेगी।
ट्रैफिक व्यवस्था दुरुस्त न होने से लगने लगा जाम
सरस्वती तीर्थ पर हजारों श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। दोपहर तक कस्बे में ट्रैफिक व्यवस्था ठीक न होने व पार्किंग स्थल निर्धारित न होने से जाम की स्थिति बनी रही। जाम में थक हार कर लोग धीरे धीरे सड़क पार करते है। अमावस के बाद शहर के लोगों ने राहत की सांस ली।