दो साल के लंबे इंतजार के बाद विघ्नहर्ता गणेश 10 सितंबर को पधार रहे हैं। गणपति जी पूरी आन-बान-शान और ढोल-नगाड़ों के साथ दस्तक देंगे। पिहोवा की पवन मार्केट के राजा गणपति जी 16वें साल में प्रवेश कर चुके हैं। 10 सितंबर को उनका पूरे विधि विधान के अनुसार राजतिलक किया जाएगा और अगले नौ दिनों तक वे अपना राजपाट संभालेंगे।
पिहोवा में पवन मार्केट के अलावा अनाज मंडी, पृथ्वेश्वर महादेव मंदिर सहित तिलक कॉलोनी में गणपति महोत्सव 10 सितंबर से शुरू होने जा रहा है। पंडाल में विराजमान होने से पहले गणेश जी को पूरे नगर का भ्रमण कराया जाएगा। 10 सितंबर की शाम को मेन चौक से भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। इस भव्य शोभा यात्रा में गणेश जी के अलग-अलग भव्य स्वरूप होंगे, जो अलग-अलग वाहनों पर सवार होंगे। मेन चौक से शुरू होकर यात्रा मेन बाजार से होते हुए सरस्वती तीर्थ व पूरे नगर का भ्रमण करेगी।
इसके बाद गणपति जी अपने पंडाल में विराजमान होंगे। पवन मार्केट के गणपति महोत्सव के अध्यक्ष विक्रम चक्रपाणी ने बताया कि हर साल की तरह गणपति महोत्सव धूमधाम, भक्ति भाव, श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। पहले दिन महंत बंसी पुरी के साथ अन्य संत महात्मा गणपति महोत्सव में पूजा अर्चना करके कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे।
पिछले साल कोरोना महामारी के कारण महोत्सव नहीं मनाया गया था, मगर परंपरा को कायम रखते हुए सूक्ष्म रूप से कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए एक दिन का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। उन्होंने बताया कि पंडाल में गणपति जी की पांच फुट लंबी भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी। इस प्रतिमा को झांसा के पास गांव श्रीनगर के कारीगर तैयार कर रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण को देखते हुए यह प्रतिमा मिट्टी से बनाई गई है। 10 सितंबर से 18 सितंबर तक नौ दिन रोजाना सुबह शाम गणपति जी की भव्य आरती की जाएगी। शाम को भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा।
वहीं जो श्रद्धालु बीमार है या पंडाल तक नहीं पहुंच सकते उन श्रद्धालुओं के लिए केबल के माध्यम से लाइव प्रसारण दिखाया जाएगा। हरियाणा में सबसे पहले गणपति महोत्सव की शुरुआत पिहोवा में पवन मार्केट से हुई थी, जो पिछले 16 साल निरंतर चल रहा है। 18 सितंबर को गणपति का सरस्वती तीर्थ में विसर्जन किया जाएगा। इसमें भव्य यात्रा के साथ गणपति जी को अगले वर्ष जल्दी आने का न्योता देकर विदा किया जाएगा। संवाद
आजादी की लड़ाई में गणपति जी का अहम रोल
भारत की आजादी में भी गणपति जी का अहम रोल है। विक्रम चक्रपाणि ने बताया कि दक्षिण भारत में बाल गंगाधर तिलक ने गणपति महोत्सव का शुभारंभ किया था। उस समय अंग्रेजों ने भारतीयों के एक जगह एकत्रित होने पर पाबंदी लगाई हुई थी, क्योंकि उस समय आजादी की लड़ाई अपने चरम पर थी। इससे अंग्रेज घबराए हुए थे और उन्होंने तरह-तरह के कानून और एक्ट बनाकर भारतीयों के एकत्रित होने पर रोक लगा रखी थी। तब बाल गंगाधर तिलक ने गणपति महोत्सव की शुरुआत की। धार्मिक उत्सव के कारण अंग्रेजों को कोई शक नहीं हुआ। इसी बीच आजादी की लड़ाई लड़ रहे सिपाही महोत्सव के बहाने रणनीति व विचार विमर्श करते थे।