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संभलकर करें सुबह की सैर जनाब, सेहत हो सकती है खराब

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208: मौसम की खबर के साथ मॉडल टाउन क्षेत्र में दिनभर छाया रहा स्मॉक। अमर उजाला
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कर्मबीर लाठर
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करनाल। पृथ्वी की सतह पर ओजोन गैस का स्तर बढ़ने से बड़े शहरों में लोगों के स्वास्थ्य पर इसका दुष्प्रभाव पड़ सकता है। करनाल शहर में बुधवार को इसकी सांद्रता 23 माइक्रोग्राम प्रति क्यूब से पार आंकी गई। सूर्योदय के समय आठ बजे तक इसकी सांद्रता ज्यादा पाई गई है। जबकि ओजोन गैस की सांद्रता 1.5 माइक्रोग्राम प्रति मीटर क्यूब हो तो स्वास्थ्य को नुकसान नहीं होता। वातावरण में इसकी बढ़ी सांद्रता से सांस लेने पर फेफड़ों की क्षमता कम हो जाती है। अस्थमा जैसे रोगों को बढ़ावा देती है। वनस्पति के अंकुरण पर भी इसका दुष्प्रभाव पाया गया है।
प्राचार्य एवं रसायनशास्त्री डॉ. राकेश भारद्वाज ने बताया कि हवा की फिजा बिगाड़ने वाले छह मुख्य घटकों में से ओजोन गैस एक है। इसलिए सुबह की सैर से परहेज करें तो बेहतर रहेगा। अगर जरूरी हो तो घर से बाहर जाते समय मास्क अवश्य पहनें और घर में आएं तो भाप अवश्य लेनी चाहिए। औद्योगिक इकाइयों, वाहनों से निकलने वाला धुआं व अन्य गतिविधियों से ऑक्साइट ऑफ नाइट्रोजन तथा वोलेटाइल आर्गेनिक कंपाउंड (जल्द वाष्पीकरण वाले रसायन) का उत्सर्जन होता है। इससे स्मॉग बनती है। स्मॉग और सूर्य की किरणें आपस में प्रतिक्रिया करने से ओजोन गैस का निर्माण होता है। पृथ्वी की सतह से ढाई मीटर ऊपर तक इसकी सांद्रता लगातार बढ़ रही है। स्मॉग बनने की प्रक्रिया रोक दी जाए तो ओजोन की सांद्रता नहीं बढ़ेगी। -संवाद
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आसमान में वरदान, धरती की सतह पर अभिशाप
डॉ. भारद्वाज ने बताया कि पृथ्वी के 20 से 50 किलोमीटर ऊपर ओजोन गैस का आवरण है जो पराबैंगनी किरणों को अपने अंदर सोख लेता है। प्रकृति के जीव-जंतुओं को सुरक्षा प्रदान करता है। इस सतह पर पर ओजोन गैस की मौजूदगी प्राकृतिक है। एक तरफ धरती से 50 किलोमीटर ऊपर ओजोन गैस सूर्य की रोशनी के साथ आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों को रोकती है वहीं भूमि स्तर पर जीव-जंतुओं व वनस्पति पर अपना दुष्प्रभाव दिखाती है।
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वातानुकूलित यंत्र भी खतरनाक
सूर्य के प्रकाश के साथ आने वाली पराबैंगनी किरणें अत्यंत हानिकारक हैं और स्किन कैंसर जैसी बीमारियों को जन्म देती हैं। वनस्पति पर भी उसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। प्रकृति के संरक्षण के लिए आसमानी सतह पर उनको रोकना भी आवश्यक है ताकि वे वायुमंडल में प्रवेश न कर पाएं। वातानुकूलित यंत्रों में प्रयोग होने वाले क्लोरोफ्लोरो हाइड्रोकार्बन रसायन की वजह से आसमान में ओजोन गैस का स्तर गिर रहा है।
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