माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। आजादी के 75 वर्ष को आजादी के अमृत महोत्सव के रूप में मनाया जा रहा है। जब आजादी के 100 साल पूरे हो जाएंगे, उस समय हमारा देश कैसा होगा, इसकी कल्पना अभी से शुरू हो गई है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड इस संबंध में अभिव्यक्ति शृंखला कार्यक्रम शुरू करने जा रहा है। इसके तहत विद्यार्थी 25 साल बाद यानी 2047 में भारत कैसा होगा या कैसा देखना चाहते हैं, इस बारे में उनके विचार लिए जाएंगे।
इस विशेष कार्यक्रम में सीबीएसई स्कूलों से कक्षा तीसरी से 12वीं तक के विद्यार्थी शामिल किए जाएंगे। ये विद्यार्थी कविता, निबंध और पेंटिंग के माध्यम से अपनी कल्पना को कागज पर उकेरेंगे। इसको लेकर सीबीएसई ने सभी स्कूलों को पत्र जारी कर दिया है। आजादी का अमृत महोत्सव के तहत यह खास कार्यक्रम 22 जनवरी से शुरू होगा। पांच फरवरी तक चलने वाले कार्यक्रम में सभी विद्यार्थियों को डिजिटल माध्यम से प्रतिभागिता करनी होगी।
कक्षाओं के हिसाब से चार वर्ग में बांटे विद्यार्थी
15 दिन चलने वाले इस विशेष कार्यक्रम में हर आयु वर्ग के विद्यार्थी की प्रतिभागिता हो, इसके लिए तीसरी से 12वीं तक के विद्यार्थियों को अलग-अलग आयु वर्ग में बांटा गया है। निबंध या पेंटिंग का विकल्प सभी वर्गों के विद्यार्थियों को दिया गया है। हालांकि निबंध के लिए शब्द सीमा अलग-अलग रखी गई है। इसी प्रकार कक्षा छठी से 12वीं तक के विद्यार्थी कविता के माध्यम से भी प्रस्तुति दे सकते हैं।
सीबीएसई एक्सप्रेशन सीरीज एप पर राष्ट्रीय स्तर तक प्रस्तुति
स्कूलों को हर कक्षा से एक एंट्री को चुनकर सीबीएसई एक्सप्रेशन सीरीज एप के माध्यम से बोर्ड को भेजना होगा। इसके बाद क्षेत्रीय स्तर पर बोर्ड के सभी जोन से प्रत्येक श्रेणी से 10 सर्वश्रेष्ठ एंट्री का चयन होगा। इसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर इनमें से तीन सर्वश्रेष्ठ एंट्री का चयन होगा। सभी को पुस्तिका के रूप में संकलित कर सीबीएसई की वेबसाइट पर प्रदर्शित किया जाएगा। हर प्रतिभागी को प्रमाण पत्र भी मिलेगा।
कक्षा और श्रेणी अनुसार माध्यम का विवरण
कक्षा श्रेणी/माध्यम
- तीसरी से 5वीं निबंध (150 शब्द)/ पेंटिंग
- 6वीं से 8वीं निबंध (400 शब्द)/पेंटिंग/कविता
- 9वीं और 10वीं निबंध (700 शब्द)/पेंटिंग/कविता
- 11वीं और 12वीं निबंध (1000 शब्द)/पेंटिंग/कविता
विद्यार्थियों का विजन जानने के लिए सीबीएसई की ओर से यह विशेष कार्यक्रम चलाया गया है। इससे यह भी पता चलेगा कि देश का भविष्य माने जाने वाले बच्चे भारत को कैसा देखना चाहते हैं। 2047 के भारत पर विचार जानने की यह कवायद शुरू की है। विद्यार्थी इसमें प्रतिभागिता जरूर करें।
- डॉ. राजन लांबा, अध्यक्ष, सहोदय स्कूल कांप्लेक्स