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134ए : तीन लाख से ज्यादा आय, प्रमाणपत्र में दर्शाई डेढ़ लाख

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माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। नियम 134ए के तहत दाखिलों को लेकर निजी स्कूल संचालकों की मनमानी बरकार है। कई स्कूलों ने अभी तक दाखिला प्रक्रिया शुरू नहीं की है। इधर अब आवेदनों में भी गड़बड़ी सामने आने लगी है। जिन विद्यार्थियों के अभिभावकों की सालाना आय तीन लाख रुपये से ज्यादा है दाखिला लेने के लिए उन्होंने आय प्रमाण पत्र में डेढ़ लाख रुपये तक दर्शाई है, क्योंकि नियम के तहत दाखिला लेने के लिए दो लाख रुपये तक वार्षिक आय होना जरूरी है।
इस तरह कई अन्य खामियां भी निकली हैं। शिक्षा निदेशालय की ओर से गठित की गई कमेटी ने ये गड़बड़ियां पकड़ी हैं। एडीसी की अध्यक्षता में जांच कर रही कमेटी की रिपोर्ट के बाद करनाल में 52 विद्यार्थियों के दाखिले स्कूलों ने निरस्त कर दिए हैं। वहीं प्रदेश में 2701 विद्यार्थियों के दाखिले निरस्त हुए। इनमें सबसे ज्यादा पानीपत और दूसरे नंबर पर कुरुक्षेत्र है। वहीं इनमें से कई विद्यार्थियों के दाखिलों को स्कूल संचालकों ने नो रिपोर्ट दर्शाकर भी दाखिला निरस्त किया है।
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प्रमाणपत्र, रिटर्न और परिवार पहचानपत्र में अलग-अलग आय
खंड शिक्षा अधिकारी के कार्यालय में आई रिपोर्ट के अनुसार, कई स्कूलों ने अपने स्तर पर भी अभिभावकों द्वारा की गई गड़बड़ी पकड़ी है। ऐसे अभिभावकों ने आयकर रिटर्न में सालाना चार लाख रुपये आय दर्शाई है। जबकि आय प्रमाण पत्र में उन्होंने अपनी आय एक लाख रुपये लिखवाई है। इसी तरह परिवार पहचान पत्रों के आधार पर जब कमेटी ने जांच की तो उनकी करीब तीन लाख रुपये मिली है। ऐसे अभिभावकों के विद्यार्थियों के दाखिलों को निरस्त कर दिया गया है।
अब तक 520 विद्यार्थियों का हो पाया दाखिला
जिले के सभी छह खंडों में 2760 विद्यार्थियों को स्कूल आवंटित हुए थे। इनमें से 2188 विद्यार्थियों को अभी दाखिले का इंतजार है। अब तक 520 विद्यार्थियों का दाखिला हो पाया है। अभिभावकों का कहना है कि स्कूल उन्हें चक्कर कटवा रहे हैं, दाखिले नहीं दिए जा रहे हैं। कोरोना व स्कूल बंद होने का हवाला देकर वापस भेज रहे हैं।
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52 विद्यार्थियों के दाखिले अभी तक निरस्त हुए हैं। जबकि 520 विद्यार्थियों का दाखिला हो चुका है। कई अभिभावकों की आय नियम के अनुसार तय आय से ज्यादा निकली है, इसलिए उनके बच्चों के दाखिले निरस्त हुए हैं। सभी पात्र विद्यार्थियों को 15 जनवरी तक दाखिला दिया जाएगा।
- रोहताश वर्मा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी
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