हरियाणा के करनाल में पांच लाख रुपये की रिश्वत के साथ पकड़े गए डीटीपी विक्रम को हरियाणा सरकार ने निलंबित कर दिया है। गिरफ्तारी के बाद उनके खिलाफ यह कार्रवाई अमल में लाई गई है। दूसरी ओर, इसी मामले में भ्रष्टाचार की जद में तहसीलदार राजबख्श पर भी निलंबन की तलवार लटक गई है।
उधर, विजिलेंस की टीम ने रिमांड के बाद डीटीपी को मंगलवार को फिर से अदालत में पेश किया, जहां से उसे तीन दिन की और रिमांड पर ले लिया गया है। तहसीलदार से भी पूछताछ के लिए दस दिन का रिमांड मांगा गया था मगर अदालत ने एक ही दिन का रिमांड मंजूर किया। पांच हजार रिश्वत लेने में फंसा डीटीपी का ड्राइवर को अदालत ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
पूछताछ के दौरान विजिलेंस ने एक और खुलासा किया है। विजिलेंस सूत्रों के अनुसार तहसीलदार राजबख्श ने डीटीपी को तीन करोड़ रुपये दिए थे। यह रुपये एक डील के रूप में दिए गए थे, यह डील किस लिए हुई थी, विजिलेंस ने अभी इसका खुलासा नहीं किया है। उधर, यह पूरी रकम भी अभी तक आरोपियों से बरामद नहीं की गई है।
विदित हो कि आरोपी डीटीपी विक्रम अवैध कॉलोनियों में रजिस्ट्री करवाने का खेल तहसीलदार राजबख्श के माध्यम से ही कराता था। वहीं, तहसीलदार राजबख्श डीटीपी विक्रम के माध्यम से ही अवैध कॉलोनियों की एनओसी जारी करवाता था। इसके लिए दोनों आरोपी कॉलोनाइजरों से मोटी रिश्वत लेते थे और फिर आपस में बंटवारा करते थे।
इससे पहले डीटीपी विक्रम के घर सेक्टर-6 से जो रिश्वत के 78.64 लाख रुपये बरामद हुए थे, उनमें से 14.50 लाख रुपये तहसीलदार राजबख्श ने ही उसेे दिए थे। डीटीपी के वकील राजीव शर्मा का कहना है कि उन्होंने एक कार भी बरामद कराई है। आरोप है कि वह रिश्वत की रकम से खरीदी गई है, हालांकि विजिलेंस का कहना है कि उन्होंने अभी कोई कार बरामदगी नहीं की है मगर जल्द इस मामले में रिकवरी हो सकती है।
उपायुक्त अनीश यादव ने बताया कि विभाग की ओर से डीटीपी को निलंबित करने के आदेश प्राप्त हो गए हैं। तहसीलदार पर विभागीय कार्रवाई की फिलहाल उनके पास कोई जानकारी नहीं है।