50 से 70 हजार रुपये में की जाती थी अवैध कॉलोनी में रजिस्ट्री
डीटीपी रिश्वत कांड में चल रही विजिलेंस जांच कीजद में अब तहसीलदार राजबख्श भी आ चुके हैं। तहसीलदार को भी मंगलवार को विजिलेंस अदालत में पेश कर रिमांड मांगेगी। मगर प्राथमिक पूछताछ में यह सामने आया है कि डीटीपी अवैध कॉलोनी में रजिस्ट्री के लिए कॉलोनाइजर की तहसीलदार से सेटिंग कराता था। फिलहाल विजिलेंस ने यह खुलासा नहीं किया है कि इन दोनों के बीच और कितने अधिकारी व कर्मचारी रिश्वत के रुपये में हिस्सेदार थे।
तहसीलदार करीब साढ़े पांच साल से करनाल तहसील में नायब तहसीलदार व तहसीलदार के पद पर तैनात है। आरोप है कि अवैध कॉलोनी में रजिस्ट्री करने के लिए तहसीलदार 50 हजार से 70 हजार रुपये रिश्वत लेता था। रिश्वत का यह खेल शहर में लंबे समय से चला रहा है। दूसरी ओर, डीटीपी विक्रम और तहसीलदार राजबख्श दोनों के साथ कई विवाद जुड़े और भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे। तहसीलदार पर तो दुष्कर्म जैसे आरोप लगे। बावजूद इसके ये दोनों अफसर काफी सालों तक करनाल में ही तैनात रहे। विजिलेंस के रडार पर अब वे अफसर और कर्मचारी हैं, जो दोनों के संपर्क में रहे और भ्रष्टाचार के इस खेल में उनके साथी बने।
तहसीलदार की गिरफ्तारी से मचा हड़कंप
सोमवार दोपहर जब विजिलेंस की टीम तहसीलदार को कार्यालय से उठाकर ले गई तो हड़कंप मंच गया। कार्यालय के अधिकारी व कर्मचारी भी इधर-उधर हो गए। कुछ समय बाद कार्यालय खाली नजर आया। सिर्फ प्रार्थी ही अपनी फाइलों को हाथ में लेकर खड़े नजर आए। तहसील के अन्य कर्मचारियों व अधिकारियों को भी डर सताने लगा है।
आज फिर अदालत में पेश होगा डीटीपी, चालक
डीटीपी विक्रम और उसके ड्राइवर बलबीर को विजिलेंस की टीम तीन दिन का रिमांड पूरा होने पर मंगलवार को कोर्ट में दोबारा पेश करेगी। विजिलेंस का कहना है कि वह मंगलवार को ही पूरे मामले का खुलासा करेगी। जिससे पता चलेगा कि रिश्वत के इस बड़े खेल में और कौन-कौन अधिकारी शामिल हैं। चर्चा है कि तहसीलदार एक बड़े नेता को अपना करीबी बताते थे।
गुरुग्राम तक पहुंचेगी जांच, नगर निगम भी आ सकता दायरे में
डीटीपी को गुरुग्राम का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है। ऐसे में विजिलेंस की जांच गुुरुग्राम की ओर भी घूम सकती है। कहीं डीटीपी ने रिश्वत का यह खेल वहां भी शुरू न किया हो, क्योंकि करनाल जिले में डीटीपी लंबे समय से रिश्वत ले रहा था। वहीं, करनाल नगर निगम भी जांच के दायरे में आ सकता है, क्योंकि आरोपी डीटीपी को नगर निगम के डीटीपी का भी कार्यभार सौंपा जा चुका है, कुछ समय पहले ही नगर निगम में अलग डीटीपी की नियुक्ति हुई है। उधर, विजिलेंस ने खुलासा किया है कि डीटीपी के पंचकूला वाले घर से उन्हें अहम दस्तावेज बरामद हुए हैं। इनमें अधिकतर दस्तावेज उसकी संपत्ति को लेकर हैं। जिनकी जांच की जा रही है।
रिश्वत न देने वालों के दस्तावेजों में निकाल दी जाती थी कमी
सूत्रों का कहना है कि अवैध कॉलोनी के साथ-साथ अन्य रजिस्ट्री के लिए भी रुपये देने होते हैं। जो व्यक्ति रुपये नहीं देता था उसके दस्तावेज में कमी निकाल दी जाती थी। उसके तहसील परिसर के चक्कर कटवाए जाते थे। ऐसे में मजबूरन उन्हें पांच से दस हजार रुपये के बीच में रिश्वत देनी होती थी। जो सभी कर्मचारियों में बंटती थी। तहसीलदार के केबिन में कुछ चिर परिचित चेहरे हर रोज नजर आते थे।
शहरवासियों का कहना है कि शहर में बड़े स्तर पर रिश्वत का खेल चल रहा था। ऐसे में सरकार को जिन अवैध कॉलोनियों में रजिस्ट्री हुई है उन्हें तुरंत रद्द करना चाहिए। तहसीलदार को विजिलेंस द्वारा उठाकर ले जाने के बाद कार्यालय में अफरातफरी मच गई। अधिकांश अधिकारियों व कर्मचारियों ने काम छोड़ दिया। इसके चलते अपने कार्यों के लिए पहुंचे लोगों को तहसील कार्यालय से निराश लौट जाना पड़ा।