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करनाल रिश्वत कांड: तहसीलदार राजबख्श गिरफ्तार, अवैध कॉलोनियों में तहसीलदार से रजिस्ट्रियां करवाता था डीटीपी

Tue, 15 Mar 2022 01:28 AM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल (हरियाणा)

सार

तहसीलदार डीटीपी से एनओसी जारी करवाता था। विजिलेंस ने सोमवार को लघु सचिवालय स्थित कार्यालय से तहसीलदार को पकड़ा और साढ़े छह घंटे पूछताछ की। डीटीपी और तहसीलदार एक-दूसरे के काम के लिए रिश्वत लेते थे, फिर आपस में बांटते थे।
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तहसीलदार राजबख्श - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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हरियाणा के करनाल में पांच लाख रुपये की रिश्वत के साथ काबू किया गया जिला नगर योजनाकार (डीटीपी) विक्रम सिंह तहसीलदार के साथ मिलकर भ्रष्टाचार का खेल चलाता था। इसी मामले में अब हरियाणा स्टेट विजिलेंस की टीम ने करनाल के तहसीलदार राजबख्श को भी गिरफ्तार कर लिया है। रिश्वत कांड में यह तीसरी गिरफ्तारी है। सोमवार दोपहर 12 बजे तहसीलदार राजबख्श को विजिलेंस की टीम ने कार्यालय से उठा लिया था। करीब छह घंटे की पूछताछ के बाद शाम 6:30 बजे विजिलेंस की टीम ने तहसीलदार की गिरफ्तारी का खुलासा किया है।

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विजिलेंस के अधिकारियों ने बताया कि डीटीपी विक्रम और तहसीलदार राजबख्श एक-दूसरे का काम कराने की एवज में लोगों से रिश्वत लेते थे। पूछताछ में डीटीपी विक्रम ने बताया कि वह अवैध कॉलोनियों में रजिस्ट्री तहसीलदार राजबख्श के माध्यम से कराता था। वहीं, तहसीलदार राजबख्श डीटीपी विक्रम के माध्यम से ही एनओसी कराता था।

इसके लिए ये दोनों लोगों से रिश्वत लेते थे और आपस में बांट लेते थे। विजिलेंस की टीम ने यह भी खुलासा किया है कि आरोपी डीटीपी विक्रम के घर सेक्टर-6 से जो रिश्वत के 78.64 लाख रुपये अलग-अलग बैगों में बरामद हुए थे, उनमें से 14.50 लाख रुपये तहसीलदार राजबख्श उसे देकर गया था।
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इसी आधार पर विजिलेंस ने तहसीलदार राजबक्श को गिरफ्तार किया है। मंगलवार को उसे कोेर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया जाएगा। वहीं, डीटीपी विक्रम व उसके ड्राइवर बलबीर का तीन दिन का रिमांड पूरा होने पर मंगलवार को दोबारा कोर्ट में पेश किया जाएगा। 

रिमांड में चल रही पूछताछ और गिरफ्तार हुआ तहसीलदार
पानीपत निवासी परमजीत की शिकायत पर हरियाणा स्टेट विजिलेंस करनाल की टीम ने गत शुक्रवार डीटीपी विक्रम को उसके करनाल स्थित सेक्टर-6 के घर से पांच लाख व उसके ड्राइवर बलबीर को पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा था। पुलिस को आरोपी विक्रम के घर से 78.64 लाख रुपये भी बरामद हुए थे, जो रिश्वत के रुपये थे। बताया जा रहा है कि आरोपी डीटीपी हर सप्ताह रिश्वत के करीब एक करोड़ रुपये इकट्ठे करता था। दोनों आरोपी रिमांड पर चल रहे हैं। मंगलवार को उनके रिमांड का दूसरा दिन था और डीटीपी से पूछताछ के दौरान ही अचानक विजिलेंस की टीम ने तहसीलदार को गिरफ्तार कर लिया है।

साढ़े पांच साल से करनाल में जमा, तबादले के तीन माह बाद ही लौट आया
तहसीलदार राजबख्श लंबे समय से करनाल में ही कार्यरत रहा है। वह 13 जुलाई 2016 से 21 जनवरी 2019 तक नायब तहसीलदार रहा। प्रमोशन होने के बाद करीब तीन साल से वह तहसीलदार करनाल के पद पर कार्यरत है। 25 फरवरी 2019 को तहसीलदार करनाल का पद संभाला था। 13 सितंबर 2019 को उसका तबादला हो गया था लेकिन फिर तीन महीने बाद दोबारा 17 दिसंबर 2019 को उसे करनाल का तहसीलदार बना दिया गया था। 

दुष्कर्म के भी लग चुके हैं आरोप
तहसीलदार की सियासी व प्रशासनिक पहुंच का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि जुलाई 2020 में शहर के एक प्राइवेट स्कूल मालिक सहित तहसीलदार पर दुष्कर्म का आरोप उसी स्कूल की अध्यापिका द्वारा लगाया गया था। आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर शहर में प्रदर्शन भी हुए थे। लेकिन पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार नहीं किया बल्कि इस मामले की जांच कैथल पुलिस को सौंप दी थी। उधर, सरकार द्वारा कराई गई जांच में सामने आया था कि करनाल तहसील में तीन अप्रैल 2017 से 13 अगस्त 2020 तक 8161 रजिस्ट्री अवैध कॉलोनी में की गई। इस जांच में तहसीलदार का भी नाम आया।

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50 से 70 हजार रुपये में की जाती थी अवैध कॉलोनी में रजिस्ट्री
डीटीपी रिश्वत कांड में चल रही विजिलेंस जांच कीजद में अब तहसीलदार राजबख्श भी आ चुके हैं। तहसीलदार को भी मंगलवार को विजिलेंस अदालत में पेश कर रिमांड मांगेगी। मगर प्राथमिक पूछताछ में यह सामने आया है कि डीटीपी अवैध कॉलोनी में रजिस्ट्री के लिए कॉलोनाइजर की तहसीलदार से सेटिंग कराता था। फिलहाल विजिलेंस ने यह खुलासा नहीं किया है कि इन दोनों के बीच और कितने अधिकारी व कर्मचारी रिश्वत के रुपये में हिस्सेदार थे। 

तहसीलदार करीब साढ़े पांच साल से करनाल तहसील में नायब तहसीलदार व तहसीलदार के पद पर तैनात है। आरोप है कि अवैध कॉलोनी में रजिस्ट्री करने के लिए तहसीलदार 50 हजार से 70 हजार रुपये रिश्वत लेता था। रिश्वत का यह खेल शहर में लंबे समय से चला रहा है। दूसरी ओर, डीटीपी विक्रम और तहसीलदार राजबख्श दोनों के साथ कई विवाद जुड़े और भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे। तहसीलदार पर तो दुष्कर्म जैसे आरोप लगे। बावजूद इसके ये दोनों अफसर काफी सालों तक  करनाल में ही तैनात रहे। विजिलेंस के रडार पर अब वे अफसर और कर्मचारी हैं, जो दोनों के संपर्क में रहे और भ्रष्टाचार के इस खेल में उनके साथी बने।

तहसीलदार की गिरफ्तारी से मचा हड़कंप
सोमवार दोपहर जब विजिलेंस की टीम तहसीलदार को कार्यालय से उठाकर ले गई तो हड़कंप मंच गया। कार्यालय के अधिकारी व कर्मचारी भी इधर-उधर हो गए। कुछ समय बाद कार्यालय खाली नजर आया। सिर्फ प्रार्थी ही अपनी फाइलों को हाथ में लेकर खड़े नजर आए। तहसील के अन्य कर्मचारियों व अधिकारियों को भी डर सताने लगा है। 

आज फिर अदालत में पेश होगा डीटीपी, चालक
डीटीपी विक्रम और उसके ड्राइवर बलबीर को विजिलेंस की टीम तीन दिन का रिमांड पूरा होने पर मंगलवार को कोर्ट में दोबारा पेश करेगी। विजिलेंस का कहना है कि वह मंगलवार को ही पूरे मामले का खुलासा करेगी। जिससे पता चलेगा कि रिश्वत के इस बड़े खेल में और कौन-कौन अधिकारी शामिल हैं। चर्चा है कि तहसीलदार एक बड़े नेता को अपना करीबी बताते थे। 

गुरुग्राम तक पहुंचेगी जांच, नगर निगम भी आ सकता दायरे में
डीटीपी को गुरुग्राम का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है। ऐसे में विजिलेंस की जांच गुुरुग्राम की ओर भी घूम सकती है। कहीं डीटीपी ने रिश्वत का यह खेल वहां भी शुरू न किया हो, क्योंकि करनाल जिले में डीटीपी लंबे समय से रिश्वत ले रहा था। वहीं, करनाल नगर निगम भी जांच के दायरे में आ सकता है, क्योंकि आरोपी डीटीपी को नगर निगम के डीटीपी का भी कार्यभार सौंपा जा चुका है, कुछ समय पहले ही नगर निगम में अलग डीटीपी की नियुक्ति हुई है। उधर, विजिलेंस ने खुलासा किया है कि डीटीपी के पंचकूला वाले घर से उन्हें अहम दस्तावेज बरामद हुए हैं। इनमें अधिकतर दस्तावेज उसकी संपत्ति को लेकर हैं। जिनकी जांच की जा रही है। 

रिश्वत न देने वालों के दस्तावेजों में निकाल दी जाती थी कमी
सूत्रों का कहना है कि अवैध कॉलोनी के साथ-साथ अन्य रजिस्ट्री के लिए भी रुपये देने होते हैं। जो व्यक्ति रुपये नहीं देता था उसके दस्तावेज में कमी निकाल दी जाती थी। उसके तहसील परिसर के चक्कर कटवाए जाते थे। ऐसे में मजबूरन उन्हें पांच से दस हजार रुपये के बीच में रिश्वत देनी होती थी। जो सभी कर्मचारियों में बंटती थी। तहसीलदार के केबिन में कुछ चिर परिचित चेहरे हर रोज नजर आते थे।

शहरवासियों का कहना है कि शहर में बड़े स्तर पर रिश्वत का खेल चल रहा था। ऐसे में सरकार को जिन अवैध कॉलोनियों में रजिस्ट्री हुई है उन्हें तुरंत रद्द करना चाहिए। तहसीलदार को विजिलेंस द्वारा उठाकर ले जाने के बाद कार्यालय में अफरातफरी मच गई। अधिकांश अधिकारियों व कर्मचारियों ने काम छोड़ दिया। इसके चलते अपने कार्यों के लिए पहुंचे लोगों को तहसील कार्यालय से निराश लौट जाना पड़ा।
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