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Jind: गांव रुपगढ़ में सर्वसम्मति से दीपक अहलावत को चुना सरपंच, भाईचारा कायम करने की ओर कदम

Tue, 11 Oct 2022 09:21 PM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, जींद (हरियाणा)

सार

दीपक ने एमटेक तक की पढ़ाई की है। साथ ही दीपक यूपीएससी प्री की दो बार परीक्षा पास कर चुका है। दीपक का कोई राजनीति बैकग्राउंड भी नहीं हुआ है। गांव के लोग पंचों को भी सर्वसम्मति से चुनने का कर रहे प्रयास।
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दीपक अहलावत। गांव में हुई पंचायत में भाग लेते रुपगढ़ के लोग। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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हरियाणा के जींद में गांव रुपगढ़ में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से 30 वर्षीय युवा दीपक अहलावत को गांव की पंचायत में सरपंच बनाने की घोषणा कर दी है। गांव में पहले तीन चार लोग सरपंच के उम्मीदवार थे लेकिन सभी ने पंचायत की बात मानते हुए सर्वसम्मति से दीपक अहलावत का नाम रख दिया। पंचायत में सभी बिरादरियों के लोग शामिल रहे। 

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पूर्व सरपंच संदीप अहलावत ने बताया कि ग्रामीणों की रविवार को बैठक बुलाई गई थी। इसमें जो-जो लोग गांव में सरपंच पद के उम्मीदवार थे उन सभी को बुलाया गया। सभी की सहमति से दीपक अहलावत का नाम सरपंच के लिए प्रस्तावित किया।

बैठक में सभी भावी उम्मीदवारों से बातचीत करने के बाद पंचायत ने निर्णय लिया कि दीपक अहलावत योग्य उम्मीदवार हैं इसलिए इनका नाम ही आगे रखा गया। सभी ने इस पर सहमति जताई। गांव में लगभग 3200 के आसपास वोटर हैं। अब गांव के लोग पंच पदों के लिए भी सर्वसम्मति से बनाने का प्रयास कर रहे हैं ताकि गांव में पूरी पंचायत सर्वसम्मति से बन सके। 
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एमटेक तक पढ़ाई की, इंजीनियर की नौकरी छोड़ रियल एस्टेट का कर रहा काम
गांव रुपगढ़ नविासी दीपक अहलावत दो बार यूपीएससी का प्री पास कर चुके हैं। दीपक अहलावत एमटेक हैं। वह इंजीनियर की नौकरी छोड़ चुके हैं। फिलहाल वह रियल एस्टेट का काम कर रहे हैं। दीपक ने 2019 में हुए विधानसभा चुनाव के समय नेशनल नेचुरल पार्टी बनाई थी। उन्होंने युवाओं को इस पार्टी में शामिल करने का अभियान चलाया था लेकिन वह सफल नहीं हुए थे। 

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बहुत अच्छी बात है कि ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से फैसला किया है। यदि ग्रामीण एक व्यक्ति का ही नामांकन करवाएंगे तो सर्वसम्मति मानी जाएगी। यदि किसी अन्य ने आवेदन कर दिया तो फिर चुनाव करवाना पड़ेगा। -रेणुका नांदल, खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी।

पढ़ा लिखा व भाईचारा कायम करने के लिए चुना दीपक को
गांव रुपगढ़ के लोगों ने बताया कि पिछली बार जब गांव में सरपंच का चुनाव हुआ तो उसमें काफी भाईचारा खराब हो गया था। इस बार के चुनाव में भाईचारा खराब नहीं हो इसलिए सर्वसम्मति बनाने के लिए गांव में पंचायत हुई। इसमें जब किसी एक को चुनने का सवाल उठा तो ग्रामीणों ने दीपक अहलावत का नाम सामने आया। दीपक पेशे से इंजीनियर भी हैं तथा गांव की समस्याओं को अच्छी तरह से जानते हैं। 
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नहीं है कोई राजनीतिक बैकग्राउंड
दीपक अहलावत का कोई राजनीतिक परिवार नहीं है। उसने 2019 में हुए विधानसभा चुनाव के समय नेशनल नेचुरल पार्टी बनाई थी ताकि वह युवाओं को जागरूक कर सकें। हालांकि दीपक ने यह पार्टी रजिस्टर्ड नहीं करवाई थी लेकिन उसने युवाओं से आह्वान किया कि वह अपने गांव तथा जिले के विकास के लिए राजनीति में आगे आएं। दीपक के पिता खेतीबाड़ी करके ही अपने बच्चों का पेट पालते थे। दीपक जब पढ़ाई करते थे तो कई बार स्कूल की फीस जमा करवाने में भी दिक्कत होती थी लेकिन अपनी मेहनत के बल पर दीपक ने गांव का नाम रोशन किया है।

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