गत माह सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में डीसी नरेश कुमार द्वारा शहर की सड़कों को बेसहारा पशु मुक्त बनाने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद प्रशासन पशुओं को पकड़ने का काम नहीं शुरू कर पाई है। इसके लिए नगर परिषद योजना ही बना रहा है और अन्ना टीम ने बुधवार रात से पशुओं को पकड़ने का काम शुरू कर दिया है। पहले दिन टीम ने 15 गोवंशों को पकड़कर नंदीशाला भिजवाया है। वीरवार रात को करीब 100 पशुओं को नंदीशाला भेजने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं नगर परिषद द्वारा पुराने ठेकेदार से ही पशुओं को पकड़वाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी सुशील कुमार ने जिला नगर आयुक्त मेजर गायत्री अहलावत को पत्र लिखा है। उनकी स्वीकृति मिलने के बाद इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा।
गौरतलब है कि जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक के बाद 27 अगस्त को एडीसी साहिल गुप्ता ने पशुओं की समस्या से निपटने के लिए नगर परिषद, डीटीओ व गोशाला संचालकों के साथ बैठक की थी। जिसमें तय हुआ था कि 31 अगस्त से पशुओं को पकड़ने का अभियान शुरू किया जाएगा। इस पर नगर परिषद ने बिना संसाधनों के पशुओं को पकड़ कर गोशाला या नंदीशाला पहुंचाने में असमर्थता जताई। इसके लिए टेंडर की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन इसमें देरी होने की आशंका के चलते अब पुराने ठेकेदार से ही पशुओं को पकड़वाने की योजना बनाई गई है।
486 रुपये में पकड़ा एक पशु
दो साल पहले नगर परिषद द्वारा पशुओं को पकड़ने के लिए टेंडर दिया गया था। इसमें ठेकेदार ने 486 रुपये में एक पशु पकड़ने का काम किया था। अब यह टेंडर समाप्त हो चुका है। नगर परिषद के अधिकारियों के अनुसार नए टेंडर की प्रक्रिया में काफी समय लगेगा। ऐसे में पुराने ठेकेदार से ही पशुओं को पकड़वाया जाएगा।
शहर में करीब 1500 बेसहारा पशु
शहर की सड़कों पर करीब 1500 बेसहारा पशु हैं। इनमें 90 प्रतिशत से अधिक गोवंश हैं। जबकि कुछ खच्चर हैं। नगर परिषद के अधिकारियों के अनुसार जुर्माने का प्रावधान होने के बाद खच्चर वैसे ही सड़कों पर नहीं आएंगे। कुछ गायें भी लोग छोड़ देते हैं। यह भी बांध ली जाएंगी। इसके बाद करीब 1500 पशुओं को पकड़ा जाएगा।
फर्म को किया गया ब्लैक लिस्ट
वहीं जिस फर्म को पहले पशु पकड़ने के लिए टेंडर दिया गया था, उसे नगर परिषद द्वारा ब्लैक लिस्ट किया गया है। नगर परिषद अधिकारियों के अनुसार फर्म द्वारा श्रम प्रमाण पत्र की प्रति साथ नहीं दी गई थी। इसके आधार पर उसे ब्लैक लिस्ट किया गया था। वहीं नियमानुसार इस प्रकार का काम करने वाली फर्म को लाइसेंस की जरूरत नहीं होती। ऐसे में इसको ब्लैक लिस्ट की सूची से हटवाने के लिए डीएमसी को पत्र भेजा गया है।
बेसहारा पशुओं को पकड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई है। पुरानी फर्म से यह काम करवाने के लिए उच्च अधिकारियों की अनुमति मांगी गई है। इसके बाद ही काम शुरू होगा। बिना संसाधनों के लावारिस पशुओं को पकड़ना खतरनाक हो सकता है। ऐसे में ठेकेदार से ही यह काम करवाया जाएगा। सुशील कुमार, कार्यकारी अधिकारी, जींद नगर परिषद।
करके दिखाया है, अधिकारी सिर्फ टालते हैं मामला
अन्ना टीम के पास भी कोई संसाधन नहीं है। इसके बावजूद पहले ही दिन 15 गोवंश को हांक कर नंदीशाला पहुंचाया गया है। पशुओं को पकड़ने की जरूरत ही नहीं है। इनको हांक कर आसानी से नंदीशाला या गोशाला पहुंचाया जा सकता है। यह करके दिखाया है। अधिकारी सिर्फ टालमटोल करते हैं। ठेकेदार द्वारा पकड़े गए पशुओं के बावजूद संख्या नहीं घटी। ऐसे में इस पर विश्वास नहीं किया जा सकता है। सुनील वशिष्ठ, अन्ना टीम।
बेसहारा पशुओं को नंदीशाला तक पहुंचाने के लिए अभियान पर निकले अन्ना टीम के सदस्य। संवाद- फोटो : Jind