मंडी आदमपुर। अपने सपनों को सिर्फ वही लोग पूरा कर पाते हैं, जो जी तोड़ मेहनत करते हैं और रास्ते में आने वाली सभी चुनौतियों और संघर्ष का डटकर सामना करते हैं। हम सभी को अपनी जिंदगी में सपने देखने चाहिए और उन्हें पूरा करने का हर संभव प्रयास करना चाहिए। सीमित संसाधनों में मुकाम हासिल कर एक मिसाल पेश की है आदमपुर क्षेत्र के एकमात्र आईपीएस बने मुरलीधर शर्मा ने। वर्तमान समय में वह कोलकाता पुलिस में ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर क्राइम के पद पर तैनात हैं।
अब आदमपुर के युवा भी मुरलीधर की राह पर चल रहे हैं। आदमपुर के हर्षित भादू ने 2016 में सिविल सर्विस परीक्षा दी। उनका आईआरएस में चयन हुआ। वह फिलहाल जोधपुर में तैनात हैं। आदमपुर के निजी स्कूल के शिक्षक राजेश पिछले ढाई साल से तैयारी कर रहे हैं। 2019 में यूपीएससी की पहली बार परीक्षा दी थी। इस बार फिर से परीक्षा देंगे। सदलपुर का निवासी आशीष खिचड़ भी सिविल सर्विस की तैयारी कर रहा है। पांच से छह अन्य युवा भी सिविल सर्विस की तैयारी कर रहे हैं।
पिता के साथ चाय की दुकान पर किया काम
पारिवारिक बंटवारा होने के बाद आईपीएस मुरलीधर शर्मा के पिता जयकरण शर्मा ने आदमपुर के दड़ौली रोड पर चाय की दुकान खोली। उनके बीमार रहने के कारण दोपहर को मुरलीधर चाय की दुकान पर बैठते थे। मायूस होना उन्होंने नहीं सीखा। इसी दौरान पिता गंभीर रूप से बीमार हो गए और दुकान बंद हो गई। करीब एक साल तक उनकी मां संतोष देवी उनके पिता को लेकर दिल्ली, चंडीगढ़ और रोहतक के अस्पतालों में उपचार के लिए चक्कर काटती रही। इस दौरान पूरे परिवार का दायित्व मुरलीधर के कंधों पर आ गया। सातवीं कक्षा में ही उन्होंने घर का खर्च चलाने के लिए दूसरे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया था।
महज 11 साल की उम्र में पिता का साया सिर से उठ जाने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। राजकीय उच्च विद्यालय में 10वीं कक्षा तक पढ़ाई करने के बाद आदमपुर के फिरोज गांधी मेमोरियल राजकीय महाविद्यालय से 12वीं की पढ़ाई की। उस समय घर की आर्थिक स्थिति ज्यादा ठीक नहीं थी। एडमिशन फीस न होने के कारण बीएएमएस में दाखिला नहीं ले पाए। इसके बाद उन्होंने पूरा ध्यान आईपीएस बनने पर लगाया।
पढ़ाई करते समय निजी स्कूल में बने पार्ट टाइम शिक्षक
बीएएमएस में दाखिला न ले पाने पर आईपीएस बनने की ठानी और कला विषय लेकर पढ़ाई आरंभ कर दी। कॉलेज में एक सांस्कृतिक समारोह में पूछा गया कि जीवन में क्या बनने की इच्छा है तो मुरलीधर ने आईपीएस बनने तमन्ना जाहिर की तो एक प्राध्यापक ने मजाक उड़ाते हुए कहा कि आईपीएस का नाम लेना आसान है बनना नहीं। बस यहीं से आईपीएस बनने को जुनून उन पर छा गया। इसके बाद उन्होंने सुबह कॉलेज जाना, बीच के खाली पीरियड में एक प्राइवेट स्कूल में पार्ट टाइम क्लास लेना और शाम को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया।
कलाकार के रूप में पहचान
पिता की मौत भी मुरलीधर को नहीं तोड़ पाई। संगीत में रुचि के चलते वे हनुमान कीर्तन मंडल से जुड़ गए। यहां पर ढोलक और हारमोनियम बजाना सीखा। फिर बाल रामलीला में अभिनय करना शुरू किया। आदमपुर की प्रतिष्ठित लक्ष्मी कला मंडल में कई सालों तक राम की भूमिका निभाई।
आदमपुर के बाद का सफर
आदमपुर के राजकीय कॉलेज से स्नातक करने के बाद पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ से स्नातकोत्तर में गोल्ड मेडलिस्ट रहे। बाद में एमफिल के लिए जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय नई दिल्ली चले गए। वर्ष 2005 में सिविल सेवा परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में भारतीय पुलिस सेवा आईपीएस के लिए चयनित हुए।
साइक्लिंग और साहित्य से लगाव
मुरलीधर शर्मा स्वयं को फिट रखने के लिए साइक्लिंग करते हैं। रोजाना 50-60 किलोमीटर तक साइकिल चलाते हैं। शर्मा को साहित्य से भी बेहद लगाव है। वे गजल लिखने में रुचि रखते हैं। एक किताब उनकी मार्केट में आ चुकी है। साहित्य जगत में मुरलीधर शर्मा को तालिब के नाम से जाना जाता है। वे अक्सर उर्दू के मुशायरा के मंच पर दिखाई देते रहते हैं। कई उर्दू टीवी चैनल पर मुशायरा में उनको सुना जा सकता है। मुरलीधर शर्मा का कहना है कि मंजिल पाने के लिए लगनशक्ति, मेहनत, हिम्मत और समय प्रबंधन की जरूरत होती है।