नेशनल हाईवे 148-बी से दो किलोमीटर अंदर के रास्ते पर बसे गांव भीमेवाला के अन्नदाताओं पर कुदरती मार बड़ी भयंकर पड़ी है। ढाई हजार की आबादी वाले इस गांव के खेतीबाड़ी के कुल रकबे 1400 एकड़ में से 800 एकड़ में जलभराव की मार किसानों ने झेली है। बारिश का पानी भरा होने से किसान अगली फसल की बिजाई करने में भी असमर्थ नजर आ रहे हैं। किसानों की चिंता है कि इस बार कहीं खेत खाली न रह जाएं। किसान तो यहां तक कह रहे हैं कि इस कुदरती कहर के कारण गांव में अकाल जैसे हालात हो रहे हैं।
दरअसल, गांव के अंदर की तरफ जा रही सड़क पर थोड़ा चलते ही गांव के किसानों की बर्बादी की तस्वीरें साफ-साफ दिखाई पड़ने लगती हैं। सड़क के दोनों तरफ खेतों में भरा हुआ पानी नरमा व धान की फसल को पूरी तरह से निगल चुका है। गांव भीमेवाला टोहाना हलके की जाट बेल्ट का आखिरी गांव है। गांव के ज्यादातर लोगों का जीवन बसर खेतीबाड़ी पर ही आधारित है। सितंबर महीने में हुई मानसून की बारिश ने धान व नरमे की फसल पूरी तरह से तबाह कर दी है। गांव भीमेवाला के खेतों में अभी भी तीन फुट तक पानी भरा हुआ है। भीमेवाला के साथ लगते हिसार जिले के उकलाना हलके के गांव बिठमड़ा में भी करीब एक हजार एकड़ से ज्यादा जमीन पानी में डूबी हुई है। किसान प्रदीप नैन व रघुबीर सिंह ने बताया कि गांव भीमेवाला में करीब 800 एकड़ जमीन पर किसान जलभराव की समस्या से जूझ रहे हैं। धान व नरमा की फसल पूरी खराब हो चुकी है।
गेहूं बिजाई के अभाव में एक हजार एकड़ से ज्यादा खेत रह सकते हैं खाली
अनुमान से ज्यादा मानसून की बारिश होने से इन खेतों में अब गेहूं की बिजाई हो पाना बहुत मुश्किल हो गया है। गांव के किसान सतपाल सिंह, बारू नैन, जिले सिंह, सूबे सिंह, मंगल सिंह, राजकुमार, ईश्वर, महासिंह, सुखविंदर, बेदु, रणधीर व राजबीर के खेतों में सबसे ज्यादा पानी भरा हुआ है। किसानों का कहना है कि अन्नदाता होने के बावजूद इस बार वह दाने-दाने के लिए तरस रहे हैं।
पानी निकासी का काम की गति बेहद धीमी
गांव भीमेवाला के खेतों से बारिश के पानी को निकालने का काम अभी तक सही तरीके से शुरू नहीं हो पाया है। खेतों में भरे पानी की निकासी बिठमड़ा माइनर में निकालने के लिए पाइप लाइन बिछाई जा रही है। इस पाइप लाइन को चालू होने में अभी पांच से सात दिन तक और लगने की संभावना है।
किसानों का पिछले वर्ष का मुआवजा भी बाकी
किसानों का कहना है कि उनका पिछले वर्ष का मुआवजा भी अभी तक नहीं आया है। ऐसे में सरकारी मदद की उम्मीद भी कम ही है। अधिकारी तकनीकी कारणों का हवाला देकर मुआवजा में देरी को लेकर पल्ला झाड़ लेते हैं।
सरकार को तत्काल मुआवजा देना चाहिए
गांव भीमेवाला में बारिश ने खूब तबाही मचाई है। अधिकांश किसान जलभराव के कारण प्रभावित हुए हैं। फसलें बर्बाद हो गई हैं। सरकार को तत्काल मुआवजा देना चाहिए।
प्रदीप कुमार, किसान, गांव भीमेवाला।
जलभराव से फसलें खराब हो गई हैं
हमारे गांव की आधी से ज्यादा कृषि भूमि पर जलभराव हो गया था। इससे फसलें खराब हो गई हैं। अगली फसल गेहूं की बिजाई भी नहीं कर पा रहे हैं।
कृष्ण कुमार, किसान, गांव भीमेवाला।
ढाई से तीन फुट पानी भरा हुआ है
गांव में ढाई से तीन फुट पानी भरा हुआ है। मेरे खुद के 20 एकड़ के बाग में काफी नुकसान हो चुका है। हम तो प्रशासन के समक्ष इस फसल के साथ-साथ अगली फसल का मुआवजा देने की मांग भी रख रहे हैं ताकि किसानों को कुछ राहत मिल सके।
बारूराम, नंबरदार, गांव भीमेवाला।
गांव भीमेवाला में पानी निकासी का काम शुरू हो चुका है। खेतों पानी भी कम होने लगा है। किसानों के पिछले वर्ष के मुआवजे को लेकर पोर्टल पर जितनी भी तकनीकी अड़चनें थी, उनको दूर कर लिया गया है। अगले कुछ दिनों में किसानों को मुआवजा मिल जाएगा।
डॉ. चिनार चहल, एसडीएम, टोहाना
गांव भीमेवाला के खेतों में हुए जलभराव का दृश्य।- फोटो : Fatehabad