जिले में बना सबसे पहला खेल स्टेडियम भोड़िया खेड़ा में है। इसके अलावा गांवों में भी छोटे-छोटे स्टेडियम बने हुए हैं। अब टोहाना में भी खेल स्टेडियम बनाने का काम चल रहा है। स्टेडियम का नाम सुनते ही युवाओं को लगता है कि एक शानदार मैदान होगा और चारों तरफ दर्शकों के बैठने के लिए शानदार सीटें भी होंगी। रात को खेलने के लिए रोशनी की व्यवस्था भी होगी। मगर धरातल पर हालात हैरान करने वाले हैं।
दरअसल, सरकारी कागजों में जिन्हें स्टेडियम कहा जाता है, वे खाली मैदान के अलावा कुछ भी नहीं हैं। ये कथित स्टेडियम दौड़ लगाने योग्य मैदान भी नहीं हैं। कहीं पर झाड़ियां उगी हुई हैं तो कहीं पर खरपतवार। गांव भोड़िया खेड़ा का खेल स्टेडियम 12 साल से भी ज्यादा पुराना है। इस खेल स्टेडियम की आज भी वही हालत है, जो दस साल पहले थी। बड़ी बड़ी घास उगी हुई है। चारों तरफ दीवारें मात्र हैं। जब यहां पर कोई खेल प्रतियोगिता होती है, तभी सफाई करवाई जाती है। इस जिला स्तरीय खेल स्टेडियम में कोच के 22 पद हैं, लेकिन यहां पर 15 कोच ही हैं। जमीनी हकीकत यही है कि जिले में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है, बल्कि सुविधाओं के अभाव में युवा आगे नहीं बढ़ पाते।
गांवों में हालात बदतर
गांवों में बने खेल स्टेडियम की भी हालात खराब है। हर गांव में खेल मैदान बने हुए हैं, जहां पशु घुस जाते हैं। खरपतवार उग जाती है। सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है। कई बार घुमंतू जाति के लोग वहां अस्थायी ठिकाना बनाकर बैठ जाते हैं। इसके अलावा सीजन के दिनों में किसान पराली आदि रख देते हैं। हासंगा के खेल मैदान को फसली सीजन में खरीद केंद्र के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
बैजलपुर : यहां प्रतिभा पर भारी पड़ रही असुविधा
सरकारी दस्तावेजों में गांव बैजलपुर में हॉकी खेल नर्सरी चल रही है। वजह ये है कि यहां के हॉकी खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। यहां बच्चा-बच्चा हॉकी का शौकीन है। मगर जमीनी हकीकत ये है कि खिलाड़ियों के लिए अभ्यास करने के लिए स्टेडियम व खेल किट तो दूर, कोच भी नहीं है। बैजलपुर के पूर्व सरपंच प्रताप शर्मा व प्रभु दयाल बताते हैं कि खेल स्टेडियम की मांग आज भी अधूरी है। बैजलपुर के लड़के एवं लड़कियों ने हॉकी खेल में अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहचान बनाई। मगर सुविधाओं के अभाव में प्रतिभाएं कमजोर पड़ रही हैं। उनके पास खेलने लायक मैदान भी नहीं है।
कोट
हमारा प्रयास है कि सरकार की तरफ से जो भी सुविधाएं मिलती हैं, उनका पूरा लाभ खिलाड़ियों को मिलना चाहिए। खिलाड़ियों को वाकई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। हम समय-समय पर सुविधाओं की मांग को लेकर सरकार को पत्र लिखते हैं। धीरे-धीरे सुविधाएं बढ़ भी रही हैं।
-जगजीत सिंह मलिक, जिला खेल अधिकारी।
भोडियाखेड़ा खेल स्टेडियम में उगी हुई घास।- फोटो : Fatehabad