चरखी दादरी। वन विभाग मानसून सीजन में अधिक से अधिक पौधरोपण के लिए अभी से तैयारियों में जुटा है। नर्सरियों में पौध तैयार करने के लिए करनाल, पिंजौर व हिसार से बीज मंगवाए हैं। जिले में इस बार छह नर्सरियों में बीज तैयार होगा। बीजरोपण का काम शुरू हो गया है और कई प्रजातियों की कलम भी लगाई जा रही हैं। इस बार करीब चार लाख पौध तैयार करने का टारगेट है और जून अंतिम सप्ताह तक यह पौध तैयार हो जाएगी।
विभाग ने जिले को हराभरा बनाने के लिए अभी से काम शुरू कर दिया है। विभाग पौधे गांव शामलात जमीन, जोहड़, सड़क व नहरों के किनारे, स्कूल, कॉलेज प्रांगण, सरकारी कार्यालयों के परिसरों में लगाता है। इसके अलावा आम लोगों को भी जरूरत के अनुसार पौधे वितरित किए जाते हैं।
पर्यावरण प्रदूषण विकट समस्या बनी रहती है। पेड़ों की संख्या लगातार घट रही है। सड़कों की चौड़ाई बढ़ने और नए रेलमार्ग बनने की वजह से हर साल राज्य के विभिन्न जिलों से लाखों की संख्या में हरे पेड़ों की कटाई मजबूरीवश करनी पड़ती है। इनके बदले नए पौधे लगाना और उनका कम से कम तीन साल तक रखरखाव करना बड़़ा मुश्किल कार्य होता है जितने पौधे रोपित होते हैं उनमें से मुश्किल से 45 प्रतिशत ही पेड़ बन पाते हैं। जिले में पिछले सालों में काफी सड़कों की चौड़ाई भी बढ़ी है। इस वजह से भी हरे पेड़ कटवाने पड़े हैं। पर्यावरण को संतुलित बनाए रखने में पेड़ों की सर्वोपरि भूमिका है। पेड़ से ही जीवों को ऑक्सीजन मिलती है।
- इन छह नर्सरियोंं में तैयार होगी पौध
वन विभाग ने जिले में छह स्थानों पर पौध नर्सरी लगाई हैं। गांव बरसाना में लोहारू नहर के समीप और गांव रामनगर-कपूरी में बधवाना नहर के समीप पौध नर्सरी है। इसी प्रकार जिले के बाढड़ा, बिंद्रावन व नीमड़ी में भी पौध नर्सरी लगाई गई है। बरसाना गांव के समीप भी नर्सरी बनाई गई है। इनमें विभिन्न प्रजातियों की पौध तैयार की जाएगी। बरसाना और रामनगर-कपूरी स्थित पौध नर्सरियों में करीब दो लाख आम प्रजातियों की पौध के अलावा टाल ट्री की पौध तैयार की जाएगी। इस प्रकार जिले में करीब चार लाख की पौध तैयार होनी है।
इन प्रजातियों की पौध की है तैयार
इन नर्सरियों में गूगल बेल, बकान, शहतूत, पीपल, नीम, गुलमोहर, हारसिंगार, शहतूत, वट, पालम खीरा, चक्रासिया, पापड़ी, जामुन सहित विभिन्न प्रजातियों की पौध तैयार की जाएगी। विभाग ने इनके लिए पिंजौर, हिसार व करनाल से बीज मंगवाया है। यह पौध जून माह के अंतिम सप्ताह तक तैयार हो जाएगी। बीजरोपण के दौरान गाय के गोबर की खाद व काली मिट्टी का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि उत्तम श्रेणी का पौधा तैयार हो सके। कुछ प्रजातियों के पौधों की कलम लगाई जा रही हैं।
नर्सरियों में बीजरोपण की प्रक्रिया जारी है। जून के अंतिम सप्ताह तक नर्सरियों में पौध तैयार हो जाएगी। नर्सरियों में सिंचाई का उचित प्रबंध है।
-चंदन सिंह, वन रक्षक