बहल (भिवानी)। पापा, मैं अब जा रही हूं। पर, मेरी आखिरी तीन ख्वाहिश हैं वो आप जरूरी पूरी करना। मेरी अर्थी में कफन की जगह मेरे शरीर पर मेरे खेल की ड्रेस सजी हो और मेरी तस्वीर पर फूलों का हार नहीं सजाना। उस पर मेरा वो मेडल लगाना जो मैंने अपने खेल में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में दूसरे नंबर पर रहकर जीता था। इसके अलावा घर में हवन केवल आर्य समाजी लोगों से ही करवाना है।
यह बातें बहल निवासी कराटे और योग की स्टेट लेवल खिलाड़ी किस्मत ने अपनी मौत से एक दिन पहले अपने पिता से कही। सुनील मिस्त्री की 14 वर्षीय बेटी शुक्रवार को इस दुनिया को अलविदा कह गई। तीन महीने पहले उसे टायफाइड हुआ था। उसके बाद सेहत में सुधार ही नहीं हुआ। मगर मौत से एक दिन पहले भी खेल के प्रति उसका जुनून हमेशा याद किया जाएगा। किस्मत के पिता ने भी अपनी बेटी की आखिरी इच्छा को पूरा करते हुए अंतिम यात्रा में उसे खेल पोशाक पहनाई और घर में लगी तस्वीर पर भी फूलों की माला की जगह उसके द्वारा राज्य स्तर पर जीता गया मेडल लगाया गया है।
2017 में आई थी आर्य समाज में, दो साल में जमाई धाक
किस्मत ने अपना खेल कॅरियर वर्ष 2017 में आर्य समाज परिसर से शुरू किया था। कराटे प्रशिक्षक अजय आर्य ने कराटे में और योग प्रशिक्षक कर्मवीर व नरेश सांखला ने योग में किस्मत के खेल को संवारना शुरू किया था। महज एक वर्ष की मेहनत के बाद ही किस्मत ने वर्ष 2018 में भिवानी में आयोजित कराटे की राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में 35 किलो भार वर्ग में रजत पदक जीता था। इसके अलावा हरियाणा ओपन कराटे 2019 में भी किस्मत ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था।
योग में हाथ अजमाया तो उसमें भी चमकी थी किस्मत
किस्मत आर्य समाज में आई तो थी कराटे सीखने के लिए लेकिन जब उसने योग में दूसरी खिलाड़ियों में शरीर की लचक देखी तो वह भी योग से जुड़ गई। योग प्रशिक्षक नरेश सांखला व कर्मवीर ने उसे ऐसा संवारा कि वो कराटे और योग दोनों में आगे बढ़ती चली गई। योग में जहां जिला स्तरीय योग प्रतियोगिता में कई बार अव्वल रही। वहीं पर राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में योग टीम का हिस्सा बनकर अपना उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। किस्मत की मौत से राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में अध्यापक और विद्यार्थी दोनों की आंखों में आंसू है। वहीं परिजनों की गम की सीमा नहीं है। किस्मत दो भाइयों और अपनी चार बहनों में दूसरे नंबर पर थी।