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नवदिवसीय अखंड शतचंडी महायज्ञ के छठे मोती रत्न से की मां भगवती महात्रिपुरसुंदरी पूजा

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भिवानी। बाबा जहरगिरी आश्रम में नवरात्रों के उपलक्ष्य में जारी नौ दिवसीय अखंड शतचंडी महायज्ञ के छठे दिन आश्रम के पीठाधीश्वर महंत अशोक गिरी महाराज ने मां भगवती महात्रिपुरसुंदरी की पूजा की। महंत ने बताया कि प्राचीन काल में राजा-महराजा सदैव रत्नादि से मां भगवती की पूजा कर राष्ट्र व राज्य की कुशल अर्थव्यवस्था की कामना करते थे।
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रत्न का महत्व समझाते हुए महंत ने बताया कि रत्न प्रकृति प्रदत्त एक मूल्यवान निधि है। मनुष्य अनादिकाल से ही रत्नों की तरफ आकर्षित रहा है। वर्तमान में भी है तथा भविष्य में भी रहेगा। रत्न सुवासित, चित्ताकर्षक, चिरस्थायीव दुर्लभ होने तथा अपने अद्भुत प्रभाव के कारण भी मनुष्य को अपने मोहपाश में बांधे हुए हैं। रत्न आभूषणों के रूप में शरीर की शोभा तो बढ़ाते ही हैं, साथ ही अपनी दैवीय शक्ति के प्रभाव के कारण रोगों का निवारण भी करते हैं। रत्नों में चिरस्थायित्व का ऐसा गुण है कि ये ऋतुओं के परिवर्तन के कारण तथा समय-समय पर प्रकृति के भीषण उथल-पुथल से तहस-नहस होने के कारण भी प्रभावित नहीं होते। इस अवसर पर पूर्व विधायक शशी परमार, बाबा कैलाश गिरी, दशरथ गिरी, बिजेंद्र जोगी, सज्जन अग्रवाल, बसंत शास्त्री, विशाल पाठक, आनंद पांडे, दीपक पाठक, नीरज पंडित, शुभम पंडित, राजेंद्र पंडित, कमल पंडित, कार्तिक, परीक्षित सिंह, शुभम सैनी, रोशन यादव उपस्थित रहे।
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