आज और कल बैंकों के कर्मचारियों और अधिकारियों की दो दिवसीय हड़ताल रहेगी। हालांकि हड़ताल वीरवार व शुक्रवार को है, लेकिन 18 दिसंबर को महीने का तीसरा शनिवार होने के कारण बैंक बंद रहेंगे। अब बैंक सोमवार को ही खुलेंगे। इसका खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ेगा। वहीं करोड़ों रुपये का लेन-देन भी प्रभावित होगा। लंबित मांगों और निजीकरण को लेकर यूनाईटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के आह्वान पर देशभर में बैंक अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा धरना प्रदर्शन किया जाएगा।
इसी कड़ी में वीरवार की सुबह सभी अधिकारी व कर्मचारी बैंक ऑफ इंडिया के समक्ष एकत्रित होंगे। यहां से एक रैली रोष स्वरूप निकाली जाएगी। इसमें सरकार के निजीकरण सहित अन्य मुद्दों पर विरोध जताया जाएगा। रोष प्रदर्शन में सभी पब्लिक सेक्टर बैंकों के कर्मचारी और अधिकारी भी हिस्सा लेंगे। वे सरकार द्वारा संसद सत्र में बैंकों का निजीकरण करने के लिए बिल पेश करने के विरोध में नारेबाजी करेंगे। इस हड़ताल व रोष प्रदर्शन में बैंकों की सात यूनियन हिस्सा लेंगी। इससे पहले भी चार दिसंबर को यूनाईटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के आह्वान पर चंडीगढ़ में एक दिन का धरना-प्रदर्शन और छावनी में सात दिसंबर को छुट्टी के बाद धरना प्रदर्शन किया गया था।
अर्थव्यवस्था को होगा भारी नुकसान
यूनियन के पदाधिकारियों आरके गुलाटी, पीसी चौहान, जीएस ओबराय, अनिल ग्रोवर व अनिल शर्मा आदि ने बताया कि यदि सरकार द्वारा सरकारी बैंकों का निजीकरण किया गया तो देश की अर्थव्यवस्था को बहुत नुकसान होगा और बहुत गंभीर समस्याएं उत्पन्न होंगी। भारत आर्थिक रूप से पिछड़ जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने बैंकों को निजीकरण करने के अपने फैसले को निरस्त नहीं किया तो देशभर के 10 लाख बैंक कर्मचारी और अधिकारी दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल के माध्यम से सरकार को सचेत करेंगे। इसके बाद भी यदि समाधान न निकला तो अनिश्चितकालीन हड़ताल का विकल्प खुला है और इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।