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सरसों की तरफ बढ़ा किसानों का रुझान, 1600 एकड़ में की बुआई

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खेत में खड़ी सरसों की फसल - फोटो : Ambala
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क्षेत्र के किसानों का रुझान इस बार तिलहन फसल सरसों की तरफ बढ़ा है। पिछले साल सरकार द्वारा तय समर्थन मूल्य से अधिक दाम में सरसों की फसल बिकने से क्षेत्र के किसान सरसों की अधिक बुआई कर रहे हैं। इसके अलावा सरसों में कम लागत, कम पानी व कम खाद को देखते हुए किसान सरसों को फायदे का सौदा समझ रहे हैं।
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वहीं अब सरसों की फसल का दाम भी अच्छा मिलता है। इस कारण पिछले साल के मुकाबले किसानों ने इस बार सरसों की फसल की अधिक बुआई की है। पिछले साल ब्लॉक में एक हजार 150 एकड़ जमीन में सरसों की फसल की बुआई की गई थी। जो इस बार बढ़कर 1600 एकड़ जमीन में हो गई है।
कम लागत में ज्यादा मुनाफा
क्षेत्र के किसान बलबीर सिंह, धर्मेंद्र, शेरसिंह व कलीराम ने बताया कि अन्य फसलों को लगाते समय लागत बहुत अधिक आती है। वहीं सरसों की फसल न्यूनतम लागत में ही लग जाती है। किसानों ने बताया कि एक एकड़ जमीन में सरसों का बीज एक से दो किलो लगता है। दूसरी ओर, सरसों की फसल में एक-दो सिंचाई की जरूरत पड़ती है। क्षेत्र में एक एकड़ में सरसों की फसल दो क्विंटल से आठ क्विंटल तक निकलती है। सरसों की फसल में अन्य खर्चे भी कम हैं। उन्होंने बताया कि पिछले साल सरसों की फसल का सरकार द्वारा तय समर्थन मूल्य 4650 रुपये था। मगर, मंडी से बाहर सरसों की फसल 7500 रुपये तक बिकी। इस कारण किसानों का रुझान सरसों की फसल की ओर इस साल अधिक बढ़ा है। वहीं इस बार सरसों का समर्थन मूल्य 5050 रुपये है।
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किसान उत्साहित
खेत की अच्छे से तैयारी करने के बाद सरसों की बुआई कर दी जाती है। सरसों की फसल एक-दो सिंचाई में ही तैयार होती है। इसलिए क्षेत्र के किसान उत्साहित हैं। किसान कम लागत, अच्छा मूल्य और अधिक उत्पादन को देखते हुए सरसों की फसल की अधिक संख्या में बुआई कर रहे हैं। इस बार 450 एकड़ अधिक जमीन में सरसों व तोड़िया की संयुक्त फसल की बुआई की गई है।
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-ललित शर्मा, तकनीकी प्रबंधक, कृषि विभाग।
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