नगर परिषद की 600 रेहड़ी चालकों को ऑनलाइन भुगतान से जुड़ने की योजना शुरुआती चरण में ही दम तोड़ती दिखाई दे रही है। गांधी मार्केट के निकट व दीना की मंडी में फल-फ्रूट व सब्जियों की रेहड़ी लगाने वाले चालकों को बाकायदा मैं डिजिटल हूं योजना से जोड़ने के लिए ट्रेनिंग भी दी गई, लेकिन यह तमाम प्रयास महज खोखले साबित हो रहे हैं।
यही कारण है कि आज भी सभी रेहड़ी चालक बरसों से चली आ रही एक हाथ से पैसे लेकर दूसरे हाथ से सामान देने की प्रथा को आगे बढ़ाते नजर आ रहे हैं। वहीं, रेहड़ी चालकों में योजना का हिस्सा बनने से पहले खाते में पैसे डलवाने से ऑनलाइन ठगी का भी खतरा मंडराने लगा है। यही कारण है कि कोई ठगी की बात तो कोई एंड्रायर्ड फोन न चलाना आने की बात तो कहीं पढ़ाई का अभाव बोलकर इससे पल्ला झाड़ रहे हैं। जोकि नगर परिषद अधिकारियों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
कोई सब्जी किलो में लेता है तो कोई आध पाव में, इस बीच पांच-पांच रुपये के लिए गुगल पेय थोड़ी न करवाएंगे। शाम के समय आढ़ती को पूरे हिसाब के साथ पैसा देना पड़ता है। ऑनलाइन भुगतान से ढेरों परेशानियां है।
राहुल
दिनभर मंडी में धूप तो कभी बरसात के बीच खड़े होकर दुकानदार करते हैं। ऐसे में एक भी भुगतान खाते में न पहुंचते तो जो कमाया है वो भी गवाना पड़ जाएगा। इतना ही नहीं ऑनलाइन भुगतान से धोखाधड़ी होने का भी खतरा है।
राकेश
ऑनलाइन भुगतान के लिए पढ़ाई का होना बेहद जरूरी है। हमने तो छोटे होते ही परिवार की जिम्मेदारियों को उठा लिया था और इस बीच पढ़ाई ही नहीं कर सके। ऐसे में ऑनलाइन भुगतान की ट्रांजेक्शन करना बेहद मुश्किल भरा हो जाता है।
सरवन
नगर परिषद की ओर से ट्रेनिंग दी गई थी लेकिन यह प्रक्रिया बेहद ही जटिल है। छोटी-छोटी राशि के लिए ऑनलाइन पेमेंट करना बड़ा मुश्किल हो जाता है। अधिकतर लोग तो ऐसे होते हैं जिनके पास ऑनलाइन पेमेंट करने का समय नहीं होता है।
आशीष
करीब 600 रेहड़ी चालक नगर परिषद एरिया में आते हैं। लोन के साथ-साथ उन्हें रेहड़ी पर ग्राहक के खाते से सीधा अपने खाते में पैसे डलवाने के लिए ऑनलाइन भुगतान की भी ट्रेनिंग दी गई है। लोन तो ले लिए हैं, लेकिन ऑनलाइन भुगतान नहीं चल रहे हैं तो यह चिंता का विषय है। दोबारा से उन्हें ट्रेनिंग देकर जागरूक किया जाएगा।
राजेश, सचिव, नगर परिषद