आलोचक एवं साहित्यकार प्रो. रामदेव शुक्ला ने बताया कि अमर उजाला की पहल बहुत अच्छी है। हिंदी में बहुत सारी विधाएं हैं, जो अन्य किसी भाषा में नहीं हैं। मेरा मानना है कि हिंदी बहुत सबल और सक्षम भाषा है। इसका मुकाबला किसी और भाषा से नहीं हो सकता है। हिंदी का विकास उसके भीतरी गुण के चलते तेजी से हो रहा है।
एक बात जरूर है कि तुकबंदी कविताओं का लेखन तेजी से हुआ है, जिन्हें ककहरा भी नहीं आता वे पुस्तकें लिख रहे हैं और पुस्तकें पुरस्कृत भी हो रहीं हैं। गांव से लेकर शहर तक कुछ लोग हिंदी के प्रति भ्रम फैला रहे हैं, बावजूद इसके हिंदी भाषा निरंतर समृद्ध हो रही है।
हिंदी हैं हम से गर्व महसूस होता है
साहित्यकार रवींद्र श्रीवास्तव जुगानी भाई ने बताया कि हिंदी हैं हम से गर्व महसूस होता है। हिंदी एक विशाल माला है, उसमें गुथी हुई गोलियां कड़ी हैं। कड़ी कमजोर हो जाएगी तो समूची माला बेकार हो जाएगी। इसलिए कड़ी को मजबूत करने की जरूरत है।
हिंदी को हम राष्ट्रभाषा नहीं बना सके। इसकी वजह से हम इसे मातृभाषा भी कहते हैं। जबकि मातृभाषा भोजपुरी और अवधी आदि हैं। इसलिए जनपदीय भाषा को मजबूत करने की जरूरत है। नई शिक्षानीति में मातृभाषा पर जोर दिया गया है। यह एक शुभ संकेत है, भविष्य में तमाम समस्याओं का समाधान इससे हो जाएगा।
अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से हिंदी हैं हम अभियान की शुरुआत की गई है। यह श्रृंखला छह सप्ताह तक चलेगी। इससे जुड़कर आप मातृभाषा को और समृद्धशाली बना सकते हैं। आपको निम्नलिखित विषयों पर तीस सेकंड का वीडियो बनाकर व्हाट्सएप करना है।
बच्चों के लिए: हमारा अखबार
रोजाना अमर उजाला अखबार पढ़ें। जो खबर या लेख पसंद आए उसे पढ़कर वीडियो बनाएं।
माता-पिता के लिए: हमारा संस्कार
हिंदी साहित्य के किसी भी प्रसिद्ध और प्रिय रचनाकार की रचना का अंश पढ़ें और रिकार्ड करें। यह कहानी, कविता, निबंध और उपन्यास जैसी कोई भी विधा हो सकती है।
युवाओं के लिए: हमारा संसार
नए समय के नए अनुभव और नए जमाने की नई बात करें या किसी भी प्रिय रचना का अंश पढ़ें और वीडियो रिकार्ड करके भेजें।
दानी-नानी के लिए: हमारा प्यार
बच्चों को सुनाएं जो किस्से, लोकगीत या गुजरे दिन की बातें जिनसे आनंद भी आया और सीख भी मिली, उसे रिकार्ड करके भेजें।