गोरखपुर में राप्ती और गोर्रा नदी का जलस्तर बीते 24 घंटे से खतरे के निशान पर आकर रुका है। घाघरा नदी के जलस्तर में भी मामूली वृद्धि हुई है। हालांकि, राहत वाली बात यह है कि अब इन तीनों नदियों का बहाव शांत होने लगा है। इसके अलावा रोहिन नदी खतरे के निशान से तीन मीटर 41 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। जलस्तर स्थिर होने के चलते अभी बाढ़ पीड़ितों को बहुत राहत तो नहीं मिली है, लेकिन अगर यही स्थिति बनी रही तो अगले एक सप्ताह में बाढ़ प्रभावित इलाकों से पानी निकल जाएगा।
पिछले महीने घाघरा, राप्ती, रोहिन, आमी व गोर्रा नदियों के बढ़े जलस्तर के चलते जिले में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई थी। गोरखपुर शहर के आसपास बसे गांवों के अलावा जिले के करीब 400 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए थे। अब धीरे-धीरे पानी घट रहा है। बुधवार की रात में हुई बारिश देखकर जलस्तर में वृद्धि का अनुमान लगाया जा रहा था, लेकिन नेपाल में बारिश नहीं होने का सकारात्मक असर यह रहा कि अब नदियों का जलस्तर स्थिर है या नीचे जा रहा है।
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गोरखपुर में बाढ़।
- फोटो : अमर उजाला।
गुरुवार को जिला प्रशासन से मिली रिपोर्ट भी सुकूनदायक है। इस रिपोर्ट के अनुसार बृहस्पतिवार की शाम चार बजे सरयू (घाघरा) नदी का अयोध्या पुल पर जलस्तर 92.50 मीटर पर था, जबकि यहां नदी के खतरे का निशान 92.73 मीटर है। नदी यहां खतरे के निशान से 23 सेंटीमीटर नीचे है। हालांकि, बीते 24 घंटे में इस नदी के जलस्तर में 10 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज हुई है, लेकिन जानकारों का मानना है कि यह बारिश का असर है, नदी के बहाव पर इसका बहुत अधिक असर नहीं होगा।
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गोरखपुर राप्ती नदी का जलस्तर।
- फोटो : अमर उजाला।
राप्ती नदी बर्डघाट गेज पर खतरे के निशान 74.98 मीटर पर बीते 24 घंटे से स्थिर है। माना जा रहा है कि अगले 24 घंटे में इसके जलस्तर में तेजी से कमी आ सकती है। एक और प्रमुख नदी गोर्रा का जलस्तर भी बीते 24 घंटे से स्थिर बना हुआ है। पिंडारा में नदी का जलस्तर 70.60 मीटर है और यहां खतरे का निशान भी 70.50 मीटर पर है। इसके अलावा रोहिन नदी के जलस्तर में तेजी से कमी आई है। त्रिमुहानी घाट पर इस नदी का खतरा बिंदु 82.44 मीटर है, जबकि नदी का वर्तमान जलस्तर 79.03 मीटर पर आ गया है।
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गोरखपुर में बाढ़।
- फोटो : अमर उजाला।
रोहिन के घटने से मिली है राहत
महराजगंज से आकर गोरखपुर शहर के पास राप्ती नदी में मिल जाने वाली रोहिन नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ता और घटता है। इसका सीधा असर राप्ती के बहाव पर पड़ता है। इस वक्त रोहिन का जलस्तर खतरे के निशान से तीन मीटर 41 सेंटीमीटर नीचे चला गया है। इससे राप्ती का बहाव भी स्थिर हुआ है। जानकारों का मानना है कि रोहिन का जलस्तर कम होने के कारण ही खतरे के निशान पर होने के बावजूद राप्ती का बहाव शांत नजर आ रहा है। राप्ती के किनारों से भी पानी तेजी से कम हो रहा है।