जिला महिला अस्पताल में फर्श पर पड़ी मरीज।
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गोरखपुर जिला महिला अस्पताल में लेबर रूम के बाहर एक महिला पेट दर्द से फर्श पर करीब ढाई घंटे तक तड़पती रही, लेकिन डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी इसे नजर अंदाज करते रहे। मीडिया से जानकारी मिलने पर आलाधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद महिला का इलाज शुरू हो सका।
जानकारी के मुताबिक महिला अस्पताल में व्यवस्था के असंवेदनशील रवैये का शिकार एक मजदूर गुड्डू महतो की गर्भवती पत्नी सोना बनीं। शुक्रवार रात अचानक सोना के पेट में तेज दर्द हुआ। साथ ही उल्टी शुरू हो गई। गुड्डू पत्नी को इलाज के लिए महिला अस्पताल लेकर आए। इमरजेंसी के डॉक्टरों ने इमरजेंसी वार्ड में भर्ती करते हुए इलाज किया, लेकिन आराम नहीं हुआ। गुड्डू ने बताया कि भर्ती करने के बाद दो बार में बाजार से उससे 335 रुपये की दवाएं मंगाई गईं। सुबह तक आराम नहीं मिला तो डॉक्टरों ने फिर बाहर से दवाएं मंगवाईं। दवा खाने और आराम करने की नसीहत देकर पत्नी को वार्ड से निकाल दिया गया। महतो ने बताया कि रुपये न होने के कारण 700 रुपये में मोबाइल गिरवी रखकर उन्होंने दवाएं खरीदीं। इसके बाद भी पत्नी को आराम नहीं मिला। उम्मीद थी कि दवाएं निशुल्क मिलेंगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। अंत में उन्हें वार्ड से निकाल भी दिया गया।
अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. रमेश गोयल ने बताया कि जानकारी मिलने के बाद मरीज को तत्काल भर्ती कराया गया है। मामले की जांच कराई जाएगी। दोष मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय ने बताया कि मामला बेहद गंभीर है। महिला के साथ अस्पताल में ऐसा व्यवहार होना ठीक नहीं है। इसकी जांच कराई जाएगी।