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गोरखपुर में मनाया जा रहा मुहर्रम: शहर में नहीं निकला कोई जुलूस; इमामबाड़े में लोगों ने चढ़ाई ताजिया

Fri, 20 Aug 2021 02:40 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।

सार

 इस्लाम में मुहर्रम से ही नए साल की शुरुआत शुरूआत होती है। लेकिन कोरोना संक्रमण की गाइड लाइन का पालन करते हुए सरकार ने मुहर्रम के जुलूस पर पूरी तरीके से प्रतिबंध लगा रखा है।
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इस साल मुहर्रम में नहीं निकला ताजिया जुलूस। - फोटो : अमर उजाला।
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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में कोविड गाइडलाइंस के अनुसार मुहर्रम मनाया जा रहा है। यहां कर्बला के 72 शहीदों के गम में 10वीं मुहर्रम पर शुक्रवार को शहर का माहौल पूरी तरह गमगीन हो रहा। इमाम के चाहने वालों ने मातम कर शहजादी को पुरसा पेश किया। घरों में गूंजती या हुसैन की सदाओं के बीच महिलाओं ने पूरी रात मातम कर कर्बला के शहीदों का गम मनाया।

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बता दें कि इस्लाम में मुहर्रम से ही नए साल की शुरुआत शुरूआत होती है। लेकिन कोरोना संक्रमण की गाइड लाइन का पालन करते हुए सरकार ने मुहर्रम के जुलूस पर पूरी तरीके से प्रतिबंध लगा रखा है। ऐसे में मुस्लिम समाज के लोगों ने कोरोना गाइडलाइंस का पूरी तरह पालन करते हुए घरों में ही त्यौहार मना रहे हैं।

यहां मियां बाजार स्थित इमामबाड़ा में लोगों ने बाबा रोशन अली शाह की मजार पर फातिया पढ़ा। मौजूद लोगों ने कहा कि कोविड-19 गाइडलाइंस का पूरा तरीके से पालन किया जा रहा है। बारी-बारी से लोग मजार पर आकर फातिहा पढ़कर यहां ताजिया चढ़ा रहे हैं। इस दौरान लोग गेट के बाहर से इमामबाड़े में स्थित सोने-चांदी की ताजिया का भी दीदार करते रहे। वहीं, हर साल यहां इमामबाड़े में लगने वाला मेला भी इस साल नहीं लगा।

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