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Exclusive: राजस्व अभिलेखों में जिंदा हो गए पर जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं, जानिए क्या है पूरा मामला

Wed, 27 Oct 2021 01:31 PM IST
vivek shukla विष्णुदत्त शुक्ला, सहजनवां (गोरखपुर)।

सार

जिले में कई जगह राजस्वकर्मियों ने स्थानीय लोगों से मिलीभगत कर जिंदा को भू-अभिलेखों में मृत दिखा दिया। ऐसे लोगों के खेत और पुश्तैनी मकान दूसरे के नाम कर दिया। राजस्व अभिलेखों में मरा दर्शाकर जमीन हड़पने की प्रक्रिया में शामिल लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होने से पीड़ित के परिजन दुखी और निराश हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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गोरखपुर जिले के सहजनवां तहसील के राजस्व और चकबंदी विभाग ने केवल नूर मोहम्मद को ही जीते जी मृत घोषित नहीं किया, तीन अन्य लोगों को भी राजस्व अभिलेखों में मरा दर्शाकर उनकी जमीन दूसरों के नाम दर्ज कर दी थी। अमर उजाला के प्रयासों से ये सभी कागजों में भी जिंदा तो हो गए, लेकिन राजस्व अभिलेखों में इन्हें मारने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।  
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राजस्व अभिलेखों में मरा दर्शाकर जमीन हड़पने की प्रक्रिया में शामिल लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होने से पीड़ित के परिजन दुखी और निराश हैं। उनका कहना है कि जिंदा होते हुए भी राजस्व अभिलेखों में मुर्दा बना दिया गया। ऐसा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि दोबारा वे किसी और के साथ इस तरह का अन्य न कर सकें। इनका कहना है कि इन मामलों के दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई होने पर ही पीड़ितों को पूर्ण न्याय मिलेगा।  
 
केस एक 
पाली ब्लॉक के ग्राम मुस्तफाबाद निवासी जियाऊ को 14 जून 2009 को तत्कालीन राजस्व कर्मियों ने राजस्व अभिलेखों में मृत दर्शा कर उनकी जमीन किसी और के नाम दर्ज कर दी थी। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ लेने के लिए 2 फरवरी 2021 को जब जियाऊ तहसील पहुंचे और खतौनी निकाली तो पता चला कि वह तो मर चुके हैं। उनकी जमीन किसी और के नाम हो चुकी है। अपने को जिंदा साबित करने के लिए जियाऊ तहसील समाधान दिवस में प्रार्थनापत्र लेकर पहुंचे। अमर उजाला ने मामला उठाया तो 15 मार्च 2021 को उन्हें न्याय मिला और राजस्व रिकॉर्ड में फिर जीवित हुए। एक माह बाद ही उनका स्वर्गवास हो गया। बड़ा बेटा राम किशन पिता को अधूरा न्याय मिलने से संतुष्ट तो है, लेकिन खुश नहीं है। राम किशन कहते हैं कि पिता राजस्व रिकॉर्ड में जीवित तो हो गए, लेकिन दोषी राजस्वकर्मियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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केस दो
पाली ब्लॉक के ही ग्राम भक्सामाफी निवासी रामकृष्ण और हरिदास को तत्कालीन राजस्वकर्मियों ने 12 दिसंबर 2015 को मृत दिखाकर उनकी खेती कृष्ण कुमारी पत्नी रामचंद्र के नाम कर दी थी। खतौनी की आवश्यकता पड़ने पर वह छह मार्च 2021 को तहसील पहुंचे थे। खतौनी निकालने पर पता चला कि उन्हें मृत दिखाकर जमीन किसी और के नाम कर दी गई है। नायब तहसीलदार पाली ने कराई और 17 मार्च 2021 को राजस्व रिकॉर्ड में उन्हें जिंदा घोषित किया गया। रामकृष्ण कहते हैं कि अपने को जिंदा साबित करने के लिए, उन्हें जो मानसिक कष्ट से गुजरना पड़ा है, उसकी भरपाई तभी हो सकती है जब दोषियों को भी सजा मिले। जब तक ऐसा नहीं होगा न्याय अधूरा है।

केस तीन
सहजनवां तहसील के पाली ब्लॉक के माड़र गांव निवासी रामचंद्र को तत्कालीन राजस्व कर्मियों ने फर्जीवाड़ा कर 30 सितंबर 2016 को राजस्व रिकॉर्ड में मृतक घोषित कर उनकी जमीन गांव के ही दो लोगों के नाम दर्ज कर दी। उनका आवास गांव की एक महिला के नाम कर दिया। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के लिए खतौनी निकालने तहसील मुख्यालय पहुंचे तो उन्हें पता चला कि उनका पुश्तैनी मकान और खेत किसी और के नाम कर दिया गया है। लंबी जद्दोजहद के बाद 21 मार्च 2021 को उन्हें राजस्व अभिलेख में जिंदा किया गया। रामचंद्र और उनके परिवारीजनों का कहना है कि यह फर्जीवाड़ा तब ही रुक सकता है, जब दोषी कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की पुनरावृत्ति न हो।

केस चार
पिपरौली ब्लॉक जैतपुर ग्राम पंचायत के गौसपुर निवासी नूर मोहम्मद रोजगार के सिलसिले में 30 वर्ष पहले अपने कुनबे के साथ दिल्ली चले गए थे। वर्ष 2008 में चकबंदी के दौरान तत्कालीन राजस्वकर्मियों ने उन्हें मृत घोषित कर गांव के ही कुछ लोगों के नाम उनकी जमीन और आवास करा दिया। अब सहायक चकबंदी अधिकारी सहजनवां राकेश तिवारी ने 22 अक्तूबर 2019 को नूर मोहम्मद को तहसील के दस्तावेज में जिंदा घोषित कर दिया है। नूर मोहम्मद उन्हें मृत बताने वाले दोषी कर्मचारियों और लोगों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने का इंतजार कर रहे हैं।

नूर मोहम्मद के गांव में मनी खुशियां
नूर मोहम्मद को राजस्व रिकॉर्ड में जिंदा होने पर उनके गांव जैतपुर गौसपुर में खुशी बनाई गई। नूर मोहम्मद को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए अमर उजाला की गांव वालों ने प्रशंसा की। नूर मोहम्मद का कहना है कि यदि अमर उजाला उनका प्रकरण नहीं उठाता तो उन्हें जीवन भर न्याय नहीं मिल पाता। न ही उनके बच्चों को पुश्तैनी मकान व जमीन मिल पाती। अब राजस्व रिकॉर्ड में नाम चढ़ने के उपरांत मौके पर तहसील प्रशासन कब तक कब्जा दिलाएगा, इसका इंतजार है। इस दौरान नूर मोहम्मद, कमला, इरशाद मोहम्मद, नौशाद, ईमानदार अली, अमजद अली, गुलाब नबी, अली शेरा, जलालुद्दीन, शिवानी, लाडू, रोशन, रोजिना, मिनतुन निश मौजूद रहे।
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