आवेदन करते समय यह साबित करना जरूरी होगा कि महायोजना लागू होने से पहले से ही भवन या भूखंड का उपयोग हो रहा है। इसके लिए कुछ प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत करने होंगे। इसके लिए पंजीकृत आर्किटेक्ट के जरिए तैयार भूमि या भवन की स्थिति का की-प्लान, साइट प्लान, स्थल पर विद्यमान भवन का मानचित्र, किसी सक्षम संस्था द्वारा मानचित्र पास हो तो उसकी प्रति, स्वामित्व प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा।
इसके अलावा नगर निगम या नगर पंचायत से जारी गृह कर, जल कर की रसीद या बिजली बिल प्रस्तुत किया जा सकता है। यदि भूमि या भवन का उपयोग प्रदूषण फैलाने वाले या संकटमय प्रकृति के उद्योग के रूप में हो रहा है तो पर्यावरण, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, अग्निशमन या विद्युत सुरक्षा का अनापत्ति प्रमाण पत्र भी देना होगा।इस योजना के तहत भवन या भूमि को नियमित कराने के बाद उसके आंतरिक प्रारूप में बदलाव किया जा सकेगा।
बाहरी डिजाइन में परिवर्तन नहीं हो सकेगा। यदि भवन को ध्वस्त कर नया निर्माण कराया जाता है तो प्राधिकरण से मानचित्र पास कराना होगा। ग्रीन बेल्ट (पार्क, खुले स्थल) के अंतर्गत यदि पुराने उपयोग को अनुमति दी जाएगी तो उस जमीन के बराबर क्षेत्रफल को महायोजना में आरक्षित किया जाएगा।
भूखंडीय आवासीय एवं अन्य उपयोग के लिए पांच रुपये प्रति वर्ग मीटर, ग्रुप हाउसिंग के लिए 15 रुपये प्रतिवर्ग मीटर, व्यावसायिक, शापिंग कांप्लेक्स, शापिंग माल, सिनेमा, मल्टीप्लेक्स, मिश्रित, कार्यालय उपयोग के लिए 30 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से प्रोसेसिंग शुल्क देना होगा।
जीडीए उपाध्यक्ष आशीष कुमार ने बताया कि प्राधिकरण के तहत आने वाले विस्तारित क्षेत्र की भूमि एवं भवनों का पुराना उपयोग जारी रखने के लिए शासन की ओर से उपविधि 2021 जारी की गई है। इसे अगली बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। बोर्ड से अंगीकृत होने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।